अब स्कूली बच्चे जानेंगे ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों की कहानी, शिक्षा मंत्रालय की नई पहल
स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होगी ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों की कहानी, बच्चों में जागेगी विज्ञान और देशभक्ति की भावना
नई दिल्ली, 20 मई। भारत की ताकतवर मिसाइलों ब्रह्मोस और आकाश की कहानी अब स्कूली बच्चे भी पढ़ सकेंगे। शिक्षा मंत्रालय ने तय किया है कि इन मिसाइलों की सफलता और शौर्य की गाथा को स्कूली पाठ्यक्रम के पूरक के रूप में सभी भारतीय भाषाओं में शामिल किया जाएगा। इसका मकसद बच्चों में विज्ञान, सुरक्षा और नवाचार के प्रति रुचि जगाना है।
शिक्षा मंत्री ने दिए संकेत
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को एक कार्यक्रम में बताया कि ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइलें हमारी वैज्ञानिक ताकत और शिक्षा प्रणाली की उपलब्धियों का प्रतीक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री अनुसंधान कोष (PM Research Fund) में बदलाव किए जा रहे हैं ताकि आने वाले समय में ज्यादा युवा वैज्ञानिक तैयार हो सकें।
बच्चों को मिलेगी प्रेरणा
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत सरकार शुरू से ही बच्चों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना पैदा करने पर जोर दे रही है। अब मिसाइल तकनीक की सफलता की कहानियों को रोचक और आसान भाषा में बच्चों को पढ़ाया जाएगा, जिससे वे देश की रक्षा ताकत और विज्ञान में रुचि लें।
चंद्रयान की तरह होगी प्रस्तुति
शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, जैसे चंद्रयान मिशन की कहानी को बच्चों तक दिलचस्प अंदाज में पहुंचाया गया था, उसी तरह अब ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों की जानकारी भी दी जाएगी। इससे बच्चों को तकनीकी ज्ञान मिलेगा और वे भारत की रक्षा क्षमताओं को समझ पाएंगे।
ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी भी
पाठ्य सामग्री में यह भी बताया जाएगा कि कैसे भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और एयरबेस पर इन मिसाइलों से निशाना साधा था। इनकी सटीकता और ताकत ने दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।
जानिए मिसाइलों की ताकत
ब्रह्मोस मिसाइल:
- रफ्तार: 9,878 किमी/घंटा
- रेंज: 400 किमी
- वजन: 1,290 किलोग्राम
- लंबाई: 8.4 मीटर
- भार वहन क्षमता: 3,000 किलोग्राम
आकाश मिसाइल:
- रफ्तार: 3,087 किमी/घंटा
- रेंज: 80 किमी
- वजन: 720 किलोग्राम
- लंबाई: 5.78 मीटर
- भार वहन क्षमता: 60 किलोग्राम
इस कदम से क्या होगा फायदा?
इस पहल से बच्चों को न सिर्फ भारत की रक्षा ताकत की जानकारी मिलेगी, बल्कि वे विज्ञान, तकनीक और नवाचार की दिशा में भी प्रेरित होंगे। साथ ही, यह देशभक्ति और गर्व की भावना को भी बढ़ावा देगा।
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