जयशंकर का सख्त संदेश: “भारत की सुरक्षा सबसे पहले, चीन और पाकिस्तान के साथ समझौता नहीं”
“सुरक्षा और आर्थिक विकास साथ चल सकते हैं, लेकिन सुरक्षा पहले आती है”
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट कहा है कि भारत की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी हाल में पाकिस्तान या चीन के साथ आर्थिक रिश्तों के लिए सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। यह बयान उन्होंने नीदरलैंड के एनओएस चैनल को दिए इंटरव्यू में दिया, जब उनसे पूछा गया कि कुछ पश्चिमी विश्लेषकों और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोच है कि भारत को चीन और पाकिस्तान से तनाव कम करके व्यापार पर ध्यान देना चाहिए।
जयशंकर ने साफ कहा, “हम ऐसे पड़ोस में रहते हैं जहां चीन जैसे आक्रामक देश और पाकिस्तान जैसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश हैं। भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को कभी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।”
पश्चिम को दी सीख – हमारी सुरक्षा ज़्यादा जटिल है
जयशंकर ने पश्चिमी देशों को यह भी समझाया कि वे भारत जैसी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कभी नहीं करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने दशकों तक शांति में जीवन बिताया, लेकिन अब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उन्हें भी असल सुरक्षा खतरों का अंदाज़ा हो रहा है।
ट्रंप के बयान पर बोले – “यह सुझाव मज़ेदार है”
जब पत्रकार ने डोनाल्ड ट्रंप के इस विचार का जिक्र किया कि अगर भारत चीन और पाकिस्तान से तनाव घटाए तो “अमीर बन सकता है”, तो जयशंकर ने इसे “मजेदार सोच“ बताया। उन्होंने कहा,
“भारत को ऐसा विकल्प नहीं मिला कि वह सिर्फ आर्थिक विकास को चुने और सुरक्षा को छोड़ दे। दोनों साथ चलती हैं, लेकिन सुरक्षा हमेशा पहले आती है।”
भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ रही है
जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत सिर्फ रक्षा ही नहीं, आर्थिक मोर्चे पर भी मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही 4 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन जाएगा। 6-8% की तेज़ विकास दर, मज़बूत ढांचागत विकास, मैन्युफैक्चरिंग, और युवा जनसंख्या के चलते भारत आज वैश्विक निवेशकों के लिए एक बड़ा केंद्र बन गया है।
पाकिस्तान और कश्मीर पर फिर दोहराया सख्त रुख
साक्षात्कार में जब पाकिस्तान और कश्मीर पर सवाल पूछा गया, तो जयशंकर ने फिर से स्पष्ट कहा कि जम्मू–कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई बातचीत होगी, तो वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) को लेकर होगी, न कि बाकी कश्मीर पर।
“कोई भी देश अपने ही हिस्से के बारे में दूसरों से बात नहीं करता,” जयशंकर ने कहा।
जब पत्रकार ने पूछा कि क्या अमेरिका या डोनाल्ड ट्रंप इस मुद्दे में मध्यस्थ बन सकते हैं, तो जयशंकर ने तुरंत जवाब दिया,
“यह भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला है। इसमें किसी तीसरे देश की जरूरत नहीं है।”
