दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति बने ली जे-म्यांग, फैक्ट्री मजदूर से बने देश के सबसे बड़े पद तक पहुंचे
गरीबी से जूझते हुए ली बने वकील, अब बने राष्ट्रपति
ली जे-म्यांग का जीवन संघर्ष और सफलता की मिसाल है। एक समय वह फैक्ट्री में मजदूरी करते थे, लेकिन पढ़ाई जारी रखी और बाद में मानवाधिकार वकील बने। अब वह दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति बन गए हैं। मंगलवार देर रात हुए चुनाव में उन्होंने भारी मतों से जीत दर्ज की। ली का जीवन उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है जो कठिन हालातों में भी सपने देखने की हिम्मत रखते हैं।
पूर्व राष्ट्रपति यून के महाभियोग में निभाई अहम भूमिका
ली जे-म्यांग दक्षिण कोरिया की डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं और उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई थी। इस वजह से पार्टी ने उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया। यून सुक-योल द्वारा ‘मार्शल लॉ’ लागू करने की कोशिश ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी थी, और यही मौका था जब ली जनता के बीच मजबूत नेता बनकर उभरे। उनकी छवि एक ईमानदार और मेहनती नेता की है, जिसने हमेशा आम जनता की आवाज़ उठाई है।

राष्ट्रपति बनने से पहले ली को चीन-उत्तर कोरिया की ओर झुकाव के लिए किया गया था ट्रोल
राष्ट्रपति बनने से पहले ली पर कई बार यह आरोप लगाए गए कि वह चीन और उत्तर कोरिया के करीब हैं और अमेरिका तथा जापान से दूरी बनाना चाहते हैं। लेकिन ली ने साफ किया है कि अमेरिका के साथ दक्षिण कोरिया का गठबंधन उनकी विदेश नीति की अहम नींव रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ली के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका की कड़ी व्यापार नीति होंगी। हालांकि वह इन मुद्दों को संतुलित ढंग से संभालने की कोशिश करेंगे।
कड़ी टक्कर में ली को मिली जीत, किम ने मानी हार
मंगलवार देर रात लगभग 95% वोटों की गिनती पूरी हो चुकी थी, जिसमें ली को 48.86% और उनके प्रतिद्वंदी किम मून सू को 41.98% वोट मिले। किम ने हार स्वीकार करते हुए ली को बधाई दी और कहा कि वह लोगों के फैसले का सम्मान करते हैं। इसके बाद ली अपने समर्थकों के सामने आए और उन्होंने शांति, अर्थव्यवस्था और बदलाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह एक नई शुरुआत है और उन्हें देश को आगे ले जाने का पूरा भरोसा है।
कब लेंगे शपथ और आगे क्या?
ली जे-म्यांग बुधवार को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। शपथ लेने के बाद उनका पहला फोकस अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और उत्तर कोरिया से शांति संबंधों को आगे बढ़ाना होगा। ली के लिए यह एक बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन उनका जीवन अनुभव और संघर्ष उन्हें एक मजबूत नेता बनाता है। देश के लोग उनसे बदलाव और स्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं।
ली की कहानी बताती है कि मेहनत और लगन से कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है – चाहे शुरुआत कितनी भी कठिन क्यों न हो।
