ईरान के 20 से ज्यादा शहरों में कुत्तों को टहलाने पर बैन, नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
ईरान में सामाजिक व्यवस्था और सुरक्षा के नाम पर लगाया गया प्रतिबंध
ईरान सरकार ने सामाजिक व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक नया फैसला लिया है। इस फैसले के तहत अब देश के 20 से ज्यादा शहरों में लोगों को अपने पालतू कुत्तों को सड़कों पर घुमाने की अनुमति नहीं होगी। तेहरान के फराज न्यूज के अनुसार जिन शहरों में यह प्रतिबंध लागू किया गया है उनमें करमानशाह, इलम, हमादान, करमान, बोरूजेर्ड, रोबत करीम, लवसनात और गोलेस्तान शामिल हैं।
कुत्तों को टहलाना बताया गया स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरा
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि कुत्तों को टहलाना लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। इसके साथ ही उनका मानना है कि इससे सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी सामने आ सकते हैं। सरकार का तर्क है कि पब्लिक प्लेसेज़ पर कुत्तों का घूमना न सिर्फ लोगों को डराता है बल्कि यह सामाजिक अनुशासन और सार्वजनिक स्वच्छता पर भी असर डालता है।
नियम तोड़ने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई
रिपोर्ट्स के मुताबिक जो लोग इस नियम का उल्लंघन करते पाए जा रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। कई जगहों से गिरफ्तारी और विरोध के मामले भी सामने आए हैं। इलाम शहर के एक अधिकारी ने यह साफ कर दिया है कि जो लोग आदेश नहीं मानेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि कार्रवाई का स्वरूप क्या होगा।

कानून नहीं, लेकिन अनुच्छेदों के आधार पर लागू किया गया प्रतिबंध
हालांकि कुत्तों को टहलाने पर कोई विशेष राष्ट्रीय कानून नहीं बना है, लेकिन ईरान के संविधान और दंड संहिता में ऐसे अनुच्छेद मौजूद हैं जिनके आधार पर यह प्रतिबंध लगाया गया है। जैसे कि अनुच्छेद 638 सार्वजनिक नैतिकता के उल्लंघन पर कार्रवाई की अनुमति देता है, अनुच्छेद 688 सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरों से निपटने की बात करता है और अनुच्छेद 40 कहता है कि कोई भी व्यक्ति दूसरों को नुकसान पहुंचाने वाला काम नहीं कर सकता।
ईरान में पालतू जानवरों को लेकर पहले भी सख्त नियम रहे हैं, लेकिन अब इस तरह से बड़े स्तर पर कुत्तों को टहलाने पर प्रतिबंध लगाना काफी चर्चा का विषय बन गया है। कई लोगों ने इस फैसले की आलोचना भी की है, जबकि सरकार इसे सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी बता रही है। अब देखना होगा कि इस फैसले का जनता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या असर होता है।
