RBI यानी Reserve Bank of India इन दिनों जमकर gold shopping कर रहा है। जून 2025 में भी RBI ने लगभग आधा टन सोना खरीदा है, जिससे भारत का कुल gold reserve अब 879.8 टन तक पहुंच गया है।
RBI की Gold Shopping से लगातार बढ़ रहा है भारत का सोना
RBI यानी Reserve Bank of India इन दिनों जमकर gold shopping कर रहा है। जून 2025 में भी RBI ने लगभग आधा टन सोना खरीदा है, जिससे भारत का कुल gold reserve अब 879.8 टन तक पहुंच गया है। इससे पहले अप्रैल 2025 में भी RBI ने करीब 57.5 टन सोने की रिकॉर्ड खरीदारी की थी, जिससे वह gold shopping के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ चुका है। लगातार हो रही इस खरीदारी ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी को 8.9% से बढ़ाकर 12.1% तक पहुंचा दिया है। इसका सीधा मतलब है कि भारत अब अपने foreign exchange reserve को और अधिक सुरक्षित तथा विविध बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
क्यों बढ़ रही है RBI की Gold Shopping?
सोना सदियों से सुरक्षित निवेश (safe haven) के रूप में जाना जाता है। जब दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है या मंदी के बादल मंडराते हैं, तो सरकारें और केंद्रीय बैंक gold shopping की तरफ रुख करते हैं। ठीक उसी तरह, RBI भी अपने foreign reserves को संतुलित करने के लिए gold reserve बढ़ा रहा है। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर, वैश्विक मंदी की आशंकाएं और डॉलर की स्थिति को देखते हुए Reserve Bank ने अपने सोने के भंडार को मजबूत करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, इसके बावजूद RBI की आक्रामक gold shopping यह दिखाती है कि भारत संभावित आर्थिक संकटों के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
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भारत को कितना फायदा मिलेगा इस सोने से?
RBI का मानना है कि मजबूत gold reserve भारत की आर्थिक नींव को और स्थिर बनाएगा। जब दुनिया भर के बाजार अस्थिर हो जाते हैं, तब सोना एक ऐसी संपत्ति बन जाता है जो किसी भी परिस्थिति में मूल्य बनाए रखती है। इसीलिए Reserve Bank भारत को मजबूत बनाने और वैश्विक जोखिमों से बचाने के लिए लगातार gold shopping कर रहा है। वैश्विक मंदी, डॉलर की गिरती विश्वसनीयता और geopolitical तनावों के बीच सोने का भंडार किसी कवच की तरह काम करता है। यह न केवल भारत की क्रेडिट रेटिंग को प्रभावित करता है, बल्कि निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को भारत की वित्तीय मजबूती का भी भरोसा दिलाता है।
Global संकटों से निपटने की तैयारी कर रहा है भारत
भारत की यह रणनीति केवल निवेश नहीं, बल्कि एक रणनीतिक योजना है। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अस्थिरता, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और भविष्य में आने वाले संभावित आर्थिक संकटों को ध्यान में रखते हुए, RBI ने gold reserve बढ़ाने का फैसला लिया है। खास बात यह है कि सोने की इस बढ़ती हिस्सेदारी से भारत न केवल फॉरेन करेंसी रिस्क को कम कर रहा है, बल्कि यह यह संकेत भी दे रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिका की आर्थिक नीतियों में बदलाव, डॉलर की अस्थिरता और चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच Reserve Bank की यह रणनीति दीर्घकालिक स्थायित्व प्रदान करेगी।
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