इजरायल-ईरान संघर्ष पर टूटी दुनिया: कुछ ने मांगी शांति, तो कुछ ने दिया छुपा समर्थन
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इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध जैसे हालात ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। कुछ देश खुलकर किसी एक पक्ष के समर्थन में आ गए हैं, जबकि कुछ पर्दे के पीछे रणनीतिक मदद कर रहे हैं। वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं जो इस संघर्ष से दूरी बनाकर शांति की अपील कर रहे हैं। यह स्थिति दिखाती है कि वैश्विक राजनीति अब भी पूरी तरह एकमत नहीं है।
सीरिया और रूस का ईरान को समर्थन, इजरायल पर लगाए गंभीर आरोप
सीरिया ने इजरायल के हमले की कड़ी निंदा करते हुए ईरान का पूरा समर्थन किया है। उसने कहा कि ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार है और इजरायल की आक्रामकता ही इस संकट की जड़ है।
वहीं रूस ने भी इजरायल पर सीधा आरोप लगाया कि उसने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है। रूस ने यह भी चेतावनी दी है कि इस हमले से क्षेत्रीय शांति खतरे में पड़ सकती है। रूस ने अपने नागरिकों को भी ईरान और इजरायल के इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है।
सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन की मिली-जुली नीति
सऊदी अरब और मिस्र ने आधिकारिक तौर पर इजरायल के हमले की आलोचना की है और तनाव कम करने की बात कही है। लेकिन खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों देशों ने अमेरिका और इजरायल को तकनीकी और सामरिक सहायता भी दी है।
जॉर्डन ने सार्वजनिक रूप से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन अमेरिका के साथ मिलकर इजरायल को हवाई सुरक्षा में मदद दी है। इससे लगता है कि ये देश सामने से शांति की बात कर रहे हैं, लेकिन अंदर से अपने रणनीतिक फायदे भी देख रहे हैं।

भारत की संतुलित भूमिका, अमेरिका ने लिया ‘सावधान‘ रुख
भारत ने इस पूरे मामले में संतुलित रुख अपनाया है। भारत ने कहा कि वह इस संघर्ष को लेकर चिंतित है और चाहता है कि दोनों देश बातचीत और कूटनीति के जरिए मसला सुलझाएं। भारत ने कहा कि किसी भी समस्या का हल युद्ध नहीं है, बल्कि शांति और संवाद से ही समाधान निकल सकता है।
उधर, अमेरिका ने खुद को हमले से अलग बताया है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका इस हमले में शामिल नहीं है, लेकिन इजरायल ने पहले ही उसे इसकी जानकारी दे दी थी। यानी अमेरिका खुलकर समर्थन नहीं कर रहा, लेकिन इजरायल की चिंता को वह समझता है।
