खोया प्यार, टूटी शादी, बर्बाद कारोबार—हर तकलीफ का ‘तुरंत समाधान’ देने का दावा करते हैं फेक अकाउंट्स
आजकल सोशल मीडिया न केवल मनोरंजन और जानकारी का जरिया बना है, बल्कि यह धोखाधड़ी का अड्डा भी बनता जा रहा है। खासकर इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे अकाउंट्स की भरमार है जो प्यार वापस लाने, पति-पत्नी के रिश्तों को सुधारने और व्यापार में नुकसान को रोकने का दावा करते हैं। ये अकाउंट्स तंत्र-मंत्र, पूजा-पाठ और विशेष क्रियाओं के नाम पर लोगों से मोटी रकम ऐंठते हैं। दुख की बात यह है कि इन पर भरोसा करने वाले अक्सर वही होते हैं जो पहले से ही मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक रूप से टूटे हुए होते हैं।

रिश्तों और भावनाओं के सहारे फर्जी तांत्रिक करते हैं शिकार, रुपये न देने पर ब्लैकमेलिंग तक
इन फेक अकाउंट्स का तरीका बहुत शातिर होता है। पहले ये सोशल मीडिया पर आकर्षक रील्स और ऐड्स के जरिए लोगों को अपनी ओर खींचते हैं। फिर व्हॉट्सऐप पर बातचीत शुरू करते हैं और पूजा के नाम पर हजारों रुपये मांगते हैं। जैसे ही कोई इनसे संपर्क करता है, ये उसकी समस्या को पहचानने की कोशिश करते हैं और तुरंत समाधान का वादा कर देते हैं। अगर कोई पैसा देने से मना करे तो ये डराने-धमकाने या ब्लैकमेल करने से भी पीछे नहीं हटते।
केस स्टडीज़: भावनात्मक रूप से कमजोर लोगों को कैसे बनाया जाता है निशाना
एक लड़की का सात साल पुराना रिश्ता टूटने के बाद जब वह इंस्टाग्राम पर रील्स देख रही थी, तब उसे एक फेक अकाउंट का ऐड दिखा। उसे प्यार वापस लाने का वादा किया गया। उसने भरोसा करके पहले 7000 रुपये दिए और फिर और रकम मांगी गई। दूसरे केस में एक महिला को पति से अनबन के चलते एक रील दिखाई गई जिसमें रिश्ते सुधारने का दावा था। महिला ने 11 हजार रुपये भेजे और कुछ तस्वीरें साझा कीं। इसके बाद उसे कब्रिस्तान में पूजा करने के लिए मजबूर किया गया और विरोध करने पर ब्लैकमेल किया गया।
“समय की मार खाया इंसान पहचान नहीं पाता सही-गलत” — एक्सपर्ट्स की राय
ज्योतिषाचार्य अरुण कुमार व्यास कहते हैं कि सोशल मीडिया पर फेक ज्योतिषियों की बाढ़ आ चुकी है। जो लोग परेशान होते हैं, वे अपनी कमजोरी के चलते जल्दी इन झूठे दावों का शिकार बन जाते हैं। इस तरह की ठगी के लिए कोई ठोस कानून न होने के कारण यह कारोबार लगातार फल-फूल रहा है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ पार्थ जैन बताते हैं कि ज्यादातर वही लोग फंसते हैं जो अपने रिश्ते, नौकरी या संतान के लिए पहले ही भावनात्मक रूप से अस्थिर होते हैं।
झूठी उम्मीदें मानसिक स्वास्थ्य को करती हैं बर्बाद
लाइफस्टाइल कोच कियारा जैन बताती हैं कि ये फर्जी तांत्रिक और ज्योतिषी लोगों को झूठी उम्मीद देते हैं। जब वादे पूरे नहीं होते तो लोग और भी ज्यादा टूट जाते हैं। उनका आत्मविश्वास, उम्मीद और सामाजिक जुड़ाव धीरे-धीरे खत्म होने लगता है। उन्हें बाद में समझ आता है कि इस आभासी दुनिया में हर कोई ईमानदार नहीं है।
कैसे बचें इस डिजिटल धोखे से?
जो भी व्यक्ति 24 या 48 घंटे में रिजल्ट देने का दावा करे, या शुरुआत में ही पैसे मांगे, उससे सतर्क रहना चाहिए। वर्तनी की गलतियां, फेक वेबसाइट, और बिना किसी वैध पहचान के प्रोफाइल फर्जीवाड़े की ओर इशारा करते हैं। जीवन और ज्योतिष कोई इंस्टेंट नूडल्स नहीं हैं, इनका असर समय लेता है।
निष्कर्ष:
सोशल मीडिया पर अध्यात्म और चमत्कार के नाम पर चल रहा यह नया कारोबार एक गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा बनता जा रहा है। जागरूक रहना, सवाल पूछना और भावनाओं पर काबू रखना ही इससे बचने का एकमात्र तरीका है।
