जन्म से दिव्यांग, लेकिन मेहनत और हिम्मत से अपनी दुनिया बसाई
बहराइच जिले के गजपतिपुर गांव के रहने वाले कन्हैयालाल एक ऐसे किसान हैं, जो दूसरों के लिए मिसाल हैं। उनका एक पैर बचपन से ही कमजोर है, जिससे वे ठीक से चल नहीं सकते। बचपन में लोग उन्हें ताने देते थे कि वह कुछ नहीं कर पाएंगे। लेकिन उन्होंने किसी की बातों पर ध्यान नहीं दिया और मेहनत से अपनी जिंदगी संवार ली।

एक पैर से करते हैं खेत की जुताई, बुवाई और सिंचाई तक का काम
कन्हैयालाल पिछले 35 सालों से अकेले अपने खेतों में काम कर रहे हैं। उनके पास 8.5 बीघा जमीन है, जिसमें वे गेहूं, धान और दालों की खेती करते हैं। खेत उनके घर से करीब 200 मीटर दूर है। पहले वे पैदल जाते थे, लेकिन अब सरकार से मिली ट्राई साइकिल से खेत तक जाते हैं। वहां पहुंचकर अपनी ट्राई साइकिल एक तरफ रखते हैं और फावड़ा-कुदाल लेकर खुद काम शुरू कर देते हैं। जुताई, निराई, सिंचाई – सब कुछ खुद ही करते हैं।
परिवार का सहारा बनी खेती, भाई की शादी और बच्चों की पढ़ाई भी की
कन्हैयालाल बताते हैं कि उनकी सारी आमदनी खेती से ही होती है। इसी से उन्होंने अपने भाई की शादी करवाई, अपना घर बनवाया और बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाया। उनकी पत्नी भी खेती में उनका साथ देती हैं। भले ही उन्हें सामान्य लोगों की तुलना में थोड़ा ज्यादा समय लगता है, लेकिन उनका काम पूरा होता है।
दिव्यांगता को नहीं बनने दिया कमजोरी, किसानों के लिए हैं एक प्रेरणा
कन्हैयालाल का कहना है कि अगर मन में हिम्मत हो और मेहनत करने की लगन हो, तो कोई भी मुश्किल आड़े नहीं आती। उनका जीवन इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण है। वे साबित करते हैं कि असली मजबूती शरीर में नहीं, हौसले में होती है। बहराइच का यह दिव्यांग किसान आज सभी किसानों और युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
