सियाम से थाइलैंड तक: इतिहास की यात्रा
7/4/25
थाइलैंड, जिसे पहले सियाम के नाम से जाना जाता था, इसका इतिहास प्राचीन और समृद्ध है। छठी से 11वीं शताब्दी के बीच ताई भाषी समूहों का आगमन दक्षिण-पूर्व एशिया में हुआ। 13वीं शताब्दी में सुखोथाई राजवंश से थाई शासन की शुरुआत हुई। इसके बाद अयुत्थया, थोनबुरी और अंततः चक्री राजवंश का उदय हुआ। 1932 में निरंकुश राजशाही का अंत हुआ और संवैधानिक राजशाही की स्थापना हुई। 1939 में सियाम का नाम बदलकर थाइलैंड रखा गया, जिसका अर्थ है “स्वतंत्र भूमि”।
भारत और थाइलैंड: सांस्कृतिक रिश्तों की गहराई
भारत और थाइलैंड के बीच संबंध हजारों वर्षों पुराने हैं। बौद्ध धर्म के जरिए इन दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रिश्ता बना। नालंदा और अयुत्थया के बीच विद्वानों का आदान-प्रदान होता रहा। रामायण की गूंज थाइलैंड में ‘रामाकियन’ के रूप में सुनाई देती है। चक्री राजवंश के संस्थापक ने खुद को ‘राम-1’ की उपाधि दी थी।

आर्थिक और रक्षा संबंधों में मजबूती
भारत और थाइलैंड के बीच 1947 से राजनयिक संबंध हैं। दोनों देशों ने अपनी-अपनी “एक्ट ईस्ट” और “एक्ट वेस्ट” नीतियों के माध्यम से रिश्तों को नई दिशा दी है। 2021-22 में द्विपक्षीय व्यापार 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा। रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग मजबूत है। सेनाओं के बीच ‘मैत्री’, ‘सियाम भारत’ और ‘भारत-थाइलैंड समन्वित गश्ती’ जैसे अभ्यास होते हैं, जो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को दर्शाते हैं।
