मशहूर अभिनेता आमिर खान ने हाल ही में भारत में सिनेमा स्क्रीनों की भारी कमी पर गहरी चिंता जताई है।
प्रसिद्ध अभिनेता आमिर खान ने हाल ही में भारत में सिनेमा स्क्रीन्स की भारी कमी को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने देश में फिल्म प्रेमियों की बड़ी संख्या के बावजूद थिएटरों की अपर्याप्त उपलब्धता को एक गंभीर समस्या बताया। वेव्स समिट 2025 के दूसरे दिन आयोजित सत्र ‘स्टूडियोज ऑफ द फ्यूचर: पुटिंग इंडिया ऑन वर्ल्ड स्टूडियो मैप’ के दौरान आमिर ने खुलकर अपनी बात रखी और सरकार व निजी निवेशकों से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की।
भारत एक फिल्म प्रेमी देश, लेकिन सिनेमा तक पहुंच नहीं
आमिर खान ने कहा कि भारत में फिल्मों को लेकर जबरदस्त प्रेम है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी आबादी की सिनेमा तक पहुंच नहीं है। उन्होंने बताया कि देश के कई जिले और क्षेत्र ऐसे हैं जहां एक भी थिएटर मौजूद नहीं है। यह स्थिति फिल्म इंडस्ट्री की वृद्धि में बाधा बन रही है। उनका मानना है कि यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक अवसर भी है, जिसे हम नजरअंदाज कर रहे हैं।
“हमें विभिन्न प्रकार के थिएटरों में निवेश करना होगा”
अभिनेता ने इस बात पर बल दिया कि देश में सिर्फ बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी थिएटर खोलने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “भारत में अपार संभावनाएं हैं। मगर ये तभी साकार होंगी जब हमारे पास देशभर में ज्यादा स्क्रीन होंगी। अगर लोगों को सिनेमा देखने की सुविधा नहीं मिलेगी, तो वे फिल्में कैसे देखेंगे?” आमिर खान ने स्थानीय स्तर पर छोटे थिएटरों, मोबाइल सिनेमाघरों और मिनी मल्टीप्लेक्स जैसे विकल्पों पर भी विचार करने की बात कही।
स्क्रीन के मामले में अमेरिका और चीन से पीछे भारत
आमिर खान ने आंकड़ों के साथ यह समझाने की कोशिश की कि भारत इस समय कितना पीछे है। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 10,000 स्क्रीन हैं, जबकि अमेरिका में, जिसकी आबादी भारत की एक तिहाई है, वहां 40,000 से अधिक स्क्रीन हैं। वहीं चीन में यह आंकड़ा 90,000 तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा, “यह तुलना दर्शाती है कि हमें कितनी गंभीरता से इस मुद्दे पर काम करने की जरूरत है।”
सिनेमा तक पहुंच बनाना राष्ट्रीय जरूरत
अंत में आमिर खान ने यह स्पष्ट किया कि थिएटरों की उपलब्धता केवल एक व्यापारिक अवसर नहीं, बल्कि यह सांस्कृतिक विकास और देश के युवाओं तक कला की पहुंच सुनिश्चित करने का जरिया भी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार, निजी क्षेत्र और फिल्म इंडस्ट्री मिलकर एक मजबूत नेटवर्क तैयार करेंगे, जिससे हर नागरिक तक सिनेमा की पहुंच हो सके।
