प्रेस विज्ञप्ति
पटना: बिहार के गया जिले में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) परियोजना को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) से 18 मार्च 2025 को पर्यावरणीय स्वीकृति मिल गई है। यह स्वीकृति ‘इंडस्ट्रियल एरिया’ श्रेणी के तहत केवल सात महीनों में प्रदान की गई है, जिससे भविष्य में औद्योगिक इकाइयों को पृथक जनसुनवाई की आवश्यकता नहीं होगी और राज्य स्तरीय अनुमोदनों की प्रक्रिया अधिक सुगम और तीव्र हो सकेगी।
मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार एवं उद्योग मंत्री श्री नीतीश मिश्रा के नेतृत्व में यह परियोजना बिहार के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने जा रही है। गया में 1,700 एकड़ में विकसित होने वाली यह आधुनिक औद्योगिक टाउनशिप उद्योग, व्यापार, आवास और सार्वजनिक सुविधाओं के संतुलित उपयोग पर आधारित होगी। इसे बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (BIMCGL) नामक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा, जिसे भारत सरकार और बिहार सरकार ने संयुक्त रूप से गठित किया है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं:
- पर्यावरणीय स्वीकृति: 18 मार्च, 2025 को प्राप्त, जिससे EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट व कंस्ट्रक्शन) टेंडर आमंत्रण की प्रक्रिया को बल मिलेगा।
- प्लग-एंड-प्ले मॉडल: उपयोगिता सेवाओं व लॉजिस्टिक समर्थन सहित तैयार औद्योगिक भूखंड।
- योजनाबद्ध कनेक्टिविटी: राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और जलमार्गों से जुड़ा समेकित ढांचा।
- टिकाऊ विकास: मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और भूखंड स्तर पर सतत योजना।
- हरित विकास: कुल क्षेत्रफल का 33% हिस्सा हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
- संभावित निवेश व रोजगार: अनुमानित ₹16,000 करोड़ का निवेश और 1.10 लाख रोजगार अवसरों की संभावना।
- स्थानीय रोजगार सृजन: यह टाउनशिप ‘काउंटर मैग्नेट सिटी’ के रूप में पलायन को रोकने और स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में सहायक होगी।
आधारभूत संरचना विकास:
BIMCGL द्वारा विकसित किए जाने वाले प्रमुख ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर में शामिल हैं:
- कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP)
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP)
- वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP)
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली (SWM)
- लॉजिस्टिक्स हब
- आंतरिक सड़क नेटवर्क
- जल निकासी प्रणाली
- प्रशासनिक भवन
- एकीकृत कमांड सेंटर
औद्योगिक क्षेत्रों का क्षेत्रवार और चरणबद्ध विकास किया जाएगा, जिससे कार्यान्वयन प्रभावी और समयबद्ध रहेगा।
संयुक्त निरीक्षण और जल प्रबंधन:
हाल ही में परियोजना स्थल पर जल भंडारण और पाइपलाइन मार्ग के निरीक्षण हेतु संयुक्त टीम का दौरा हुआ, जिसमें NICDC, BIADA, जल संसाधन विभाग, NIH रुड़की, वन विभाग बिहार और गया जिला प्रशासन के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह निरीक्षण जल स्रोत की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करने और उसे क्लस्टर योजना में एकीकृत करने के उद्देश्य से किया गया।
यह परियोजना न केवल बिहार, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती है, जो टिकाऊ विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक उत्कृष्टता का प्रतीक बनेगी।
