मध्य एशिया में भारत की नई रणनीति: सहयोग, विकास और सांस्कृतिक जुड़ाव
ताशकंद सम्मेलन में भारत ने क्षेत्रीय सहयोग पर रखा अपना नजरिया
उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में “मध्य एशिया में स्थिरता और विकास के अवसर” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन ताशकंद राज्य ओरिएंटल स्टडीज विश्वविद्यालय (TSUOS) ने किया, जिसमें 17 देशों के विशेषज्ञों और विद्वानों ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से प्रोफेसर रामाकांत द्विवेदी, जो MERI-CIS और इंडिया सेंट्रल एशिया फाउंडेशन (ICAF) के प्रमुख हैं, ने भाग लिया। उन्होंने “मध्य एशिया में क्षेत्रीय सहयोग और एकीकरण: एक भारतीय दृष्टिकोण” विषय पर अपना विचार प्रस्तुत किया।
प्रो. द्विवेदी ने बताया कि भारत और मध्य एशिया के बीच बहुत पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में यह क्षेत्र भारत के लिए भू-राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
तीन चरणों में समझिए मध्य एशिया का सहयोग मॉडल
प्रो. द्विवेदी ने कहा कि मध्य एशिया में क्षेत्रीय सहयोग की प्रक्रिया तीन अलग-अलग चरणों में विकसित हुई है:
- पहला चरण (1991-2005): जब 1991 में सोवियत संघ बिखर गया, तो उससे अलग होकर मध्य एशिया के पाँच देश स्वतंत्र हो गए। इसके बाद इन देशों ने मिलकर मध्य एशियाई सहयोग संगठन (CACO) बनाया, ताकि आपस में बातचीत और सहयोग बढ़ाया जा सके। यह संगठन क्षेत्रीय एकता की दिशा में पहला कदम था।दूसरा चरण (2005-2015): इस समय में CACO और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EEU) के ज़रिए आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिला। देशों ने आपस में व्यापार, निवेश और बुनियादी ढांचे पर ध्यान दिया।
- तीसरा चरण (2016 से अब तक)*: उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोएव के नेतृत्व में क्षेत्रीय सहयोग को और आगे बढ़ाया गया। इस दौर में ट्रांस-क्षेत्रीय परियोजनाओं जैसे परिवहन और ऊर्जा नेटवर्क पर विशेष ज़ोर दिया गया।
उन्होंने बताया कि आज CAREC, SCO और EEU जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस क्षेत्र में सहयोग को मज़बूती दे रही हैं।
भारत और मध्य एशिया: अब रिश्ते और भी मजबूत
भारत ने हाल के वर्षों में मध्य एशिया के साथ अपने रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। भारत–मध्य एशिया संवाद और इंडिया–सेंट्रल एशिया बिजनेस काउंसिल के ज़रिए व्यापार, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहन मिला है। इसरो (ISRO) ने कज़ाखस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों में अंतरिक्ष और तकनीकी विकास में सहायता की है।
सिर्फ व्यापार ही नहीं, भारत सांस्कृतिक रूप से भी इस क्षेत्र से जुड़ रहा है। भारत, बौद्ध विरासतों के संरक्षण में मदद कर रहा है और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से रिश्तों को मज़बूत कर रहा है। इसके अलावा, भारत की सौर ऊर्जा, जल प्रबंधन और सूखा कृषि की तकनीकें भी इस क्षेत्र में विकास लाने में मदद कर रही हैं।
भारत का उद्देश्य: साझेदारी, स्थिरता और समृद्धि
भारत की रणनीति साफ है – वह मध्य एशिया के साथ दीर्घकालिक साझेदारी चाहता है जो आर्थिक विकास, स्थिरता और सांस्कृतिक जुड़ाव पर आधारित हो। भारत, आतंकवाद और अस्थिरता के खिलाफ भी मध्य एशियाई देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। भारत मानता है कि इस क्षेत्र में सहयोग और एकीकरण से पूरे एशिया में शांति और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
इस तरह, भारत मध्य एशिया में न सिर्फ एक व्यापारिक भागीदार, बल्कि एक भरोसेमंद दोस्त और सहयोगी के रूप में उभर रहा है।
