बचपन म्यांमार में बीता, लेकिन भविष्य जुड़ा भारत से
विजय रूपाणी का जन्म 2 अगस्त 1956 को म्यांमार (तत्कालीन बर्मा) के येनगोन शहर में हुआ था। उनके पिता रमणिकलाल रूपाणी व्यापार के सिलसिले में म्यांमार में बसे थे। वे सात भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। लेकिन 1960 में म्यांमार में राजनीतिक उथल-पुथल के चलते उनका परिवार भारत लौट आया और गुजरात के राजकोट शहर में बस गया।
राजकोट में ही विजय रूपाणी का बचपन बीता और आगे चलकर उन्होंने यहीं से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की।
छात्र जीवन से ही राष्ट्र सेवा की भावना, जेल भी गए
राजकोट में उन्होंने सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी से बीए और एलएलबी की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़ गए और यहीं से उनकी राष्ट्रवादी सोच ने दिशा पाई।
1971 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े। 1975 में देश में जब आपातकाल लगा, तब विजय रूपाणी लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे आए और 11 महीने तक जेल में रहे। यह दौर उनके जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ और यहीं से उनका राजनीतिक जीवन गंभीर रूप से शुरू हुआ।
नगर निगम से लेकर राज्यसभा तक का सफर
विजय रूपाणी का राजनीतिक करियर 1996-97 में राजकोट नगर निगम के मेयर बनने से शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1998 में वे गुजरात भाजपा के प्रदेश सचिव बने और संगठनात्मक अनुभव हासिल किया।
2006 में उन्हें गुजरात पर्यटन निगम का चेयरमैन बनाया गया और उसी साल वे राज्यसभा के लिए चुने गए। 2012 तक उन्होंने राज्यसभा में गुजरात का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए वे गुजरात म्यूनिसिपल फाइनेंस बोर्ड के चेयरमैन भी बने।

मुख्यमंत्री बनने तक का राजनीतिक सफर
2014 में विजय रूपाणी ने राजकोट वेस्ट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद वे आनंदीबेन पटेल के मंत्रिमंडल में परिवहन मंत्री बने। 2016 में उन्हें भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया और कुछ ही समय बाद 7 अगस्त 2016 को वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने।
2017 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने उनके नेतृत्व में जीत दर्ज की और वे दोबारा मुख्यमंत्री बने। 2021 तक उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला और एक शांत, सुलझे हुए नेता के रूप में पहचान बनाई।
निजी जीवन में भी अनुभवों से भरा सफर
विजय रूपाणी ने भाजपा महिला मोर्चा की सदस्य अंजली से विवाह किया। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। एक बेटे का निधन एक कार दुर्घटना में हो गया था, जो उनके जीवन का बेहद दुखद क्षण था। उनकी बेटी की शादी हो चुकी है और उनका बेटा इंजीनियर है।
उनका जीवन यह दिखाता है कि साधारण शुरुआत से भी एक व्यक्ति अपने विचारों, मेहनत और सेवा भावना के बल पर बड़ी जिम्मेदारी तक पहुंच सकता है।
