बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर BJP में अंदरूनी नाराज़गी गहराने लगी है। IAS स्तर के अनुभव रखने वाले कई नेताओं को पार्टी ने जिलों का प्रभारी बना दिया है
BJP में IAS-स्तरीय नेता भी पद से नाखुश, Bihar Politics में गहराता असंतोष
Bihar में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर BJP में अंदरूनी नाराज़गी गहराने लगी है। IAS स्तर के अनुभव रखने वाले कई नेताओं को पार्टी ने जिलों का प्रभारी बना दिया है, जिससे उनके चुनाव लड़ने के सपनों को झटका लगा है। ये वही BJP नेता हैं जो लंबे समय से प्रदेश उपाध्यक्ष, मंत्री या मोर्चा प्रमुख जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। अब उन्हें कभी अधीनस्थ रहे कार्यकर्ताओं के अंतर्गत काम करना होगा, जिससे असंतोष बढ़ गया है।
“यह हमारे कद के अनुसार नहीं”: BJP नेताओं का संगठन को स्पष्ट संदेश
कई नेताओं ने खुलकर या परोक्ष रूप से पार्टी नेतृत्व को संदेश दिया है कि मौजूदा ज़िम्मेदारी उनके कद और अनुभव के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि वे पार्टी के प्रति निष्ठावान हैं, लेकिन अब तक की सेवा के बाद वे Bihar Politics में अपनी दावेदारी को मान्यता दिलाना चाहते हैं। ऐसे नेताओं ने दायित्व संभालने से इनकार कर दिया है या केवल औपचारिक भूमिका निभाने का संकेत दिया है।
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BJP ने पूर्व जिलाध्यक्षों को भी जिला प्रभारी बनाया, फिर भी राहत नहीं
52 संगठनात्मक जिलों में पार्टी ने कई पूर्व जिलाध्यक्षों को भी प्रभारी बनाया है, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की नाराज़गी थम नहीं रही है। कई नेताओं का तर्क है कि वे वर्षों से Bihar में जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं, और विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय भी हैं। वे अभी भी आशा रखते हैं कि चुनाव के समय पार्टी उनका नाम प्रत्याशियों की सूची में ज़रूर शामिल करेगी।
आयोगों और बोर्ड की जिम्मेदारियों से भी नेताओं ने किया किनारा
BJP की ओर से कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और पूर्व पदाधिकारियों को सरकार द्वारा गठित आयोगों, बोर्डों और निगमों में पद दिए गए, लेकिन यहां भी असंतोष दिखा। कई नेताओं ने पदभार ग्रहण करने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें जो दायित्व दिया गया है, वह सम्मानजनक नहीं है और उनके राजनीतिक कद के अनुरूप नहीं है। इससे पार्टी के भीतर भीतर ही सत्ताकेंद्र और संगठन के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है।
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