आनंद एस. जोंधले को मिला 'डॉ. आंबेडकर जन्मभूमि पुरस्कार', सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित
भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के शुभ अवसर पर मध्य प्रदेश के महू में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय सचिव (सामाजिक न्याय विभाग) आनंद एस. जोंधले को ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जन्मभूमि पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे आनंद एस. जोंधले
यह समारोह एनसीपी (एसपी) की मध्य प्रदेश इकाई द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें श्री जोंधले मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में डॉ. आंबेडकर के जीवन संघर्ष, समरस समाज के निर्माण में उनके योगदान, और महिलाओं के अधिकारों के लिए किए गए उनके कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा साहब ने समानता आधारित समाज की नींव रखी।
सम्मान पर जोंधले का भावुक वक्तव्य
सम्मान प्राप्त करते हुए श्री जोंधले ने कहा,
“यह मेरे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि मुझे वर्ष 2025 का ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जन्मभूमि पुरस्कार’ मिला है। यह सम्मान मेरे अब तक के सामाजिक प्रयासों की स्वीकृति है। मैं इस पुरस्कार के लिए निर्णायक मंडल और सभी संगठनों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहब के विचार उन्हें सदैव प्रेरित करते आए हैं, और यह सम्मान उन्हें समाज के लिए और अधिक निष्ठा से कार्य करने की प्रेरणा देगा।
युवाओं को डॉ. आंबेडकर के विचारों से जुड़ने का आह्वान
श्री जोंधले ने संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांतों को देश की सबसे बड़ी ताक़त बताया। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे बाबा साहब के विचारों से प्रेरणा लेकर सामाजिक सुधार में सक्रिय भूमिका निभाएं।
समारोह में उमड़ा जनसैलाब
समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आंबेडकर की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
इस अवसर पर मंच से यह संकल्प भी लिया गया कि डॉ. आंबेडकर के विचारों और संदेशों को घर-घर तक पहुंचाया जाएगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धांजलि
समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रेरणादायक भाषणों के माध्यम से बाबा साहब को श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने उनके विचारों को आत्मसात करने और समाज में व्याप्त असमानता के खिलाफ संघर्ष को जारी रखने का आह्वान किया।
