पाकिस्तान के अशांत वजीरिस्तान क्षेत्र में एक बार फिर आतंकवाद का कहर देखने को मिला।
TTP हमले में मेजर मुईज ढेर, सुरक्षा पर सवाल
पाकिस्तान के अशांत वजीरिस्तान क्षेत्र में एक बार फिर आतंकवाद का कहर देखने को मिला। कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमले में पाकिस्तानी सेना के मेजर मुईज अब्बास शाह और लांस नायक जिबरान की मौत हो गई। पाकिस्तान सरकार और सेना दोनों इस घटना को लेकर गंभीर हैं, क्योंकि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब देश की आंतरिक सुरक्षा पहले से ही सवालों के घेरे में है।
मेजर मुईज अब्बास शाह वही अधिकारी थे, जिन्होंने साल 2019 में भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को पकड़ने का दावा किया था। यह घटना भारत-पाकिस्तान के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गई थी। आइए इस पूरे घटनाक्रम और इससे जुड़ी अहम बातों पर नजर डालते हैं।
वजीरिस्तान में बड़ा आतंकी हमला, पाक सेना को भारी नुकसान
यह हमला पाकिस्तान के अशांत इलाके उत्तर वजीरिस्तान में हुआ, जहां सुरक्षा बल एक सैन्य ऑपरेशन चला रहे थे। इसी दौरान TTP के आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला किया, जिसमें मेजर मुईज अब्बास शाह और लांस नायक जिबरान शहीद हो गए।
पाकिस्तान की सेना ने दावा किया है कि जवाबी कार्रवाई में 11 आतंकवादी मारे गए हैं। हालांकि, इस हमले ने एक बार फिर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
कौन थे मेजर मुईज अब्बास शाह? अभिनंदन से जुड़ा था नाम
मेजर मुईज अब्बास शाह पाकिस्तान के चकवाल जिले के रहने वाले थे और सेना की सबसे खतरनाक यूनिट स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) से जुड़े हुए थे। वे उस वक्त सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भारत के विंग कमांडर अभिनंदन को पकड़ने का दावा किया था।
विंग कमांडर अभिनंदन का मिग-21 विमान पाकिस्तान में क्रैश हुआ था, जिसके बाद उन्हें पाक सेना ने हिरासत में लिया था। बाद में भारत की कूटनीतिक कोशिशों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते पाकिस्तान को तीन दिन के भीतर अभिनंदन को रिहा करना पड़ा।
पाकिस्तान की सेना ने बताया “शहीद”, जारी किया आधिकारिक बयान
पाक सेना ने मेजर मुईज को “शहीद” बताते हुए बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि वह एक सैन्य ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे। बयान में यह भी दावा किया गया कि इस ऑपरेशन में 11 आतंकवादी ढेर किए गए हैं।
हालांकि, इस बयान के बावजूद पाकिस्तान की जनता और विश्लेषक इस बात से चिंतित हैं कि देश में चरमपंथ और आतंकी गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं।
पाकिस्तान की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हमले ने एक बार फिर पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और आतंकवाद से निपटने की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पाकिस्तान अफगान सीमा से सटे इलाकों में आतंकवाद को काबू में लाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर TTP जैसे संगठन खुली चुनौती दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान चरमपंथी संगठनों पर दोहरी नीति अपनाता रहेगा, तब तक आंतरिक सुरक्षा की स्थिति और बिगड़ती जाएगी।
