डॉ. के. ए. पॉल ने युद्ध और हथियार सौदों की राजनीति पर उठाए सवाल, 24 घंटे के वैश्विक शांति दिवस की अपील
राजनीति में हथियारों की भूमिका पर कड़ी आलोचना, वैश्विक नेताओं की जवाबदेही की मांग
नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रसिद्ध शांति समर्थक और ईसाई धर्म प्रचारक डॉ. के. ए. पॉल ने अंतरराष्ट्रीय नेताओं, विशेषकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पर हथियार व्यापार और युद्ध को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक राजनीति में इंसानी जानों से ज़्यादा महत्व अब हथियारों के सौदों को दिया जा रहा है।
400 मिलियन डॉलर की रिश्वत का दावा, ट्रंप पर लगाए गंभीर आरोप
डॉ. पॉल ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप ने कतर के एक अमीर व्यक्ति से निजी विमान के रूप में 400 मिलियन डॉलर की रिश्वत ली, जिससे उन्हें हथियारों की आपूर्ति में सहयोग मिलता रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने भारत-पाक तनाव के समय शांति के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया। पॉल ने कहा, “भारत-पाक युद्ध भगवान और मैंने रोका, ट्रंप तो हथियार बेचने में व्यस्त थे।”
अरब देशों की असुरक्षा पर चिंता, भारत को आत्मनिर्भर बनने का सुझाव
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देश इस डर से हथियार खरीदते जा रहे हैं कि कहीं उनका हश्र भी गद्दाफी या सद्दाम हुसैन जैसा न हो जाए। भारत को लेकर उन्होंने कहा कि देश को अब अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं खोजना चाहिए और विदेशी ताकतों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
भारत से वैश्विक शांति की पहल का आह्वान
डॉ. पॉल ने कहा कि भारत अगर अपने सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाए, तो यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में वैश्विक शांति का नेतृत्व कर सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे गांधी और पटेल की तरह शांति के मार्ग पर चलें।
इंडिगो एयरलाइंस पर लगाया शांति सम्मेलन में बाधा डालने का आरोप
डॉ. पॉल ने इंडिगो एयरलाइंस की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि एयरलाइंस ने उन्हें तुर्की में आयोजित शांति सम्मेलन में जाने से रोका। उन्होंने इसे मानवीय कार्यों में राजनीतिक हस्तक्षेप का गंभीर उदाहरण बताया।
24 मई को 24 घंटे का ‘वैश्विक प्रार्थना और शांति दिवस’ मनाने की अपील
डॉ. पॉल ने घोषणा की कि 24 मई शाम 6 बजे से 25 मई शाम 6 बजे तक “वैश्विक प्रार्थना और शांति दिवस” मनाया जाएगा। उन्होंने सभी देशों के नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों, धार्मिक स्थलों या सार्वजनिक स्थानों पर कम से कम पांच मिनट शांति के लिए प्रार्थना करें।
भारत से शांति की शुरुआत का संकल्प, सभी धर्मों के प्रतिनिधियों ने दी सहभागिता
इस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया, जिनमें सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और बौद्ध शांति मंच के अध्यक्ष आनंद एस. जोंधले और मुस्लिम समाज के प्रमुख अशरफी अकबर अली प्रमुख रहे। सभी ने एक स्वर में 24 मई को “शांति दिवस” के रूप में मनाने की अपील की।
भारत में एकजुटता और वैश्विक नेतृत्व का संदेश
अंत में डॉ. पॉल ने कहा, “भारत खुद अपना ध्यान रख सकता है,” और इसे दुनिया का सबसे बड़ा, सक्षम और संभावनाशील लोकतंत्र बताते हुए वैश्विक शांति में नेतृत्व करने का आह्वान किया।
