नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में देशभर से आए बंजारा प्रतिनिधियों ने सरकारी उपेक्षा, भूमि मुआवज़ा, सांस्कृतिक संरक्षण और शिक्षा–स्वास्थ्य सुधार से जुड़े प्रमुख मुद्दों को उठाया।
नई दिल्ली, 29 नवंबर 2025:
देशभर के बंजारा समुदाय ने आज राजधानी में आयोजित “हैलो बंजारा – चलो दिल्ली / दिल्ली आओ बंजारा – बजाओ नंगड़ा” अभियान के राष्ट्रीय पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में एकजुट होकर अपनी ऐतिहासिक, सामाजिक और विकास संबंधी मांगों को मजबूती से उठाया। इस आयोजन का नेतृत्व बंजारा भारत तथा नव–गठित अखिल भारतीय बंजारा महा सेवा संघ ने किया, जिसमें लगभग सभी राज्यों से समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम में पूर्व सांसद और बंजारा भारत के संरक्षक–अध्यक्ष रविंद्र नायक ने कहा कि आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी लगभग बीस राज्यों में बंजारा टांडा, नगला और डेरे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने बताया कि पेयजल, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाएं अभी तक बड़ी संख्या में बस्तियों तक नहीं पहुंचीं। विभिन्न राज्यों में SC, ST, OBC और VJNT जैसे अलग-अलग वर्गों में विभाजित होने के कारण यह विशाल समुदाय सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर हाशिए पर रहा है, जबकि इसकी उपस्थिति 200 संसदीय और 1,000 विधानसभा क्षेत्रों में फैली हुई है।
नेताओं ने ऐतिहासिक व्यक्तित्व लक्की शाह बंजारा का विशेष उल्लेख किया, जिनका टांडा कभी 350 एकड़ में फैला था और जहां आज रायसीना हिल्स स्थित है—वही इलाका जहाँ राष्ट्रपति भवन और संसद जैसे राष्ट्रीय प्रतीक मौजूद हैं। समुदाय ने वर्षों से लंबित शेष भूमि मुआवज़ा मुद्दे के तत्काल समाधान की मांग दोहराई।
कार्यक्रम में देशभर के उन बंजारा धरोहर स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुख रहा, जिनका सांस्कृतिक महत्व अत्यंत व्यापक है। इनमें लोहारगढ़ (हरियाणा), मांगरह (राजस्थान), लखी सराय (बिहार), मथुरा–वृंदावन (उत्तर प्रदेश), सागर लक्की शाह झील (मध्य प्रदेश), बंजारा हिल्स व गोलकुंडा गेट (तेलंगाना), बाबा हाथीराम मठ (तिरुपति) और तमिलनाडु के कदंबुर हिल्स शामिल हैं।
साझा मांग पत्र में बंजारा/गोर बोली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया, जो पहले तेलंगाना विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव पर आधारित है। साथ ही, सोलहों बंजारा उपसमूहों को एक समान राष्ट्रीय दर्जा देकर “वन नेशन, वन बंजारा” की नीति लागू करने की मांग भी प्रमुख रही।
आयोजकों ने राष्ट्रीय स्तर पर बंजारा टांडा–नगला–डेरे विकास बोर्ड बनाने की मांग की, ताकि देशभर की बस्तियों में जरूरी सेवाओं का सुनियोजित विकास सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही दिल्ली और हैदराबाद में राष्ट्रीय बंजारा संग्रहालय और राष्ट्रीय बंजारा विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव भी सामने रखा गया, जिससे सांस्कृतिक अनुसंधान और शिक्षा को बढ़ावा मिले।
यायावर बंजारा युवाओं के लिए आधिकारिक पहचान पत्र और सुरक्षा प्रावधान की भी जोरदार मांग की गई, ताकि उनके छोटे व्यापार और होकिंग कार्यों को वैध और संरक्षित किया जा सके।
बंजारा महिलाओं में शिक्षा की कमी को देखते हुए 200 जिला मुख्यालयों में बंजारा महिला आवासीय विद्यालय स्थापित करने की मांग भी रखी गई। इसी क्रम में NCR की प्रमुख सड़कों को बंजारा प्रतीकों के नाम पर रखने, राष्ट्रीय बंजारा अनुसंधान एवं विकास आयोग बनाने, संसद परिसर में लक्की शाह बंजारा और मकन शाह लुबाना की मूर्तियां स्थापित करने, राष्ट्रीय ट्रेन का नाम “बंजारा भारत रेल” रखने और बंजारा रेजिमेंट की स्थापना जैसी मांगें भी उठाई गईं।
कार्यक्रम का समापन समुदाय की एकता, सम्मान और अधिकारों की पुनर्स्थापना के संकल्प संदेश के साथ हुआ। आयोजकों ने केंद्र सरकार से अपील की कि बंजारा समुदाय से जुड़े सभी लंबित ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व विकास से जुड़े मुद्दों का शीघ्र समाधान किया जाए।
