इजरायल ने ग्रेटा थनबर्ग समेत 12 कार्यकर्ताओं को किया डिपोर्ट, गाजा जा रही राहत नौका को समुद्र में रोका
गाजा के लिए रवाना हुई थी राहत सामग्री से भरी नौका
गाजा में मानवीय संकट को देखते हुए फ्रीडम फ्लोटिला गठबंधन (FFC) की ओर से एक विशेष राहत मिशन शुरू किया गया था। “मैडलीन” नाम की नौका में चावल, शिशु आहार और अन्य ज़रूरी सामग्री भरी गई थी, जिसे गाजा के लोगों तक पहुंचाना था। लेकिन इजरायली सेना ने इस नौका को गाजा तट से लगभग 185 किलोमीटर दूर समुद्र में ही रोक दिया और उसे जब्त कर लिया।

ग्रेटा थनबर्ग सहित 12 कार्यकर्ताओं को किया गया डिपोर्ट
नौका पर सवार 12 लोगों को, जिनमें पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, फ्रांस की यूरोपीय संसद सदस्य रीमा हसन और अल जज़ीरा के पत्रकार उमर फयाद शामिल थे, इजरायल के बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे लाया गया। यहां से उन्हें देश से बाहर भेज दिया गया यानी डिपोर्ट कर दिया गया। इन यात्रियों में ब्राजील, जर्मनी, नीदरलैंड, स्पेन, स्वीडन और तुर्की के नागरिक भी थे।
इजरायल ने उठाया कानूनी कार्रवाई का मुद्दा
इजरायली विदेश मंत्रालय ने कहा कि जो यात्री निर्वासन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे, उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा। इजरायली सरकार का दावा है कि यह कार्रवाई सुरक्षा कारणों से की गई है, जबकि मिशन का दावा है कि यह एक शांतिपूर्ण और मानवीय प्रयास था।
फ्रीडम फ्लोटिला गठबंधन ने इजरायली कार्रवाई को बताया गैरकानूनी
इस घटना के बाद फ्रीडम फ्लोटिला गठबंधन ने इजरायल पर आरोप लगाया कि उसकी सेना ने “अवैध तरीके से” राहत नौका पर चढ़ाई की और “हमला” किया। गठबंधन का कहना है कि उनका मकसद केवल गाजा में फंसे लोगों तक राहत पहुंचाना था, न कि किसी राजनीतिक विवाद को जन्म देना।
डॉक्युमेंट्री दिखाकर कार्यकर्ताओं को दी गई जानकारी
इजरायली रक्षा मंत्री योव गैलंट ने बताया कि सभी कार्यकर्ताओं को पहले मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया और फिर उन्हें 7 अक्टूबर को हमास द्वारा किए गए हमलों की एक डॉक्युमेंट्री दिखाई गई। गैलंट के अनुसार, डॉक्युमेंट्री शुरू होते ही कई कार्यकर्ताओं ने उसे देखना छोड़ दिया, जिससे उन्होंने “सच्चाई से आंखें मूंदने” का आरोप लगाया।
फ्रांस के राष्ट्रपति ने की आलोचना, नागरिकों की रिहाई की मांग
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस घटना की तीखी आलोचना की और फ्रांसीसी नागरिकों की तुरंत रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा कि फ्रांस अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और संकट की घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी होती है। उन्होंने गाजा पर जारी मानवीय नाकेबंदी को “एक घोटाला” और “अपमानजनक” बताते हुए इसे तुरंत समाप्त करने की अपील की।
मानवीय संकट के बीच सवालों के घेरे में इजरायली रुख
इस पूरी घटना ने इजरायल की मानवीय मुद्दों पर नीति को लेकर वैश्विक बहस छेड़ दी है। एक तरफ कार्यकर्ताओं का दावा है कि वे केवल जरूरतमंदों की मदद करना चाहते थे, वहीं इजरायल का कहना है कि सुरक्षा सर्वोपरि है। इस बीच, गाजा में मानवीय संकट गहराता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
