मॉनसून की दस्तक जल्दी, 27 मई तक पहुंच सकता है केरल – जानें कहां तक पहुंचा है मानसून और कितना असर डालेगा मई का मौसम
मई की आंधी-बारिश का मानसून पर नहीं पड़ेगा असर, 27 मई तक दस्तक देने की संभावना
नई दिल्ली, 20 मई। मई का महीना इस बार भारत में मौसम के लिहाज़ से थोड़ा अलग रहा। गरज-चमक के साथ आंधी, धूलभरी हवाएं और सामान्य से कम तापमान ने लोगों को राहत तो दी, लेकिन सभी के मन में यह सवाल उठ रहा है – क्या इसका असर आने वाले मानसून पर पड़ेगा?
मौसम विभाग के विशेषज्ञों का जवाब है – नहीं। भारत मौसम विभाग (IMD) ने साफ किया है कि मई की इन मौसमी गतिविधियों का दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। बल्कि, इस साल मॉनसून समय से पहले यानी 27 मई के आसपास केरल और बंगाल की खाड़ी में दस्तक दे सकता है।
क्या कहता है मौसम विभाग?
IMD के प्रमुख एम. मोहपात्रा के अनुसार, इस बार मई में पश्चिमी विक्षोभ और नमी की अधिकता के कारण तूफानी गतिविधियां ज्यादा देखने को मिलीं। इनकी वजह से मई में सामान्य से अधिक बारिश हुई है, खासकर उत्तर और मध्य भारत में। हालांकि, राजस्थान के कुछ हिस्सों में गर्मी की लहर ज़रूर रही है।
मोहपात्रा ने यह भी कहा कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में मई के आखिरी हफ्ते में गर्मी थोड़ी बढ़ सकती है। अगर गर्मी के कारण ‘हीट लो’ यानी कम दबाव का क्षेत्र नहीं बनता, तो मानसून की बारिश थोड़ी कमजोर हो सकती है। ‘हीट लो’ वह सिस्टम होता है जो मानसून की नमी को अपनी ओर खींचता है और बारिश को बढ़ाता है।
मानसून की स्थिति अभी कैसी है?
IMD के अनुसार, सोमवार तक मानसून दक्षिण अरब सागर, मालदीव, कोमोरिन क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। अगले 2-3 दिनों में यह और आगे बढ़ेगा और दक्षिण तथा मध्य भारत की ओर तेज़ी से बढ़ने लगेगा।
सामान्य से अधिक बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि जून से सितंबर 2025 के बीच सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। हालांकि, यह भी साफ किया गया कि मानसून कब शुरू होता है, इसका मतलब यह नहीं है कि शुरुआत में ही बहुत बारिश होगी। असली फर्क बारिश की मात्रा और उसकी निरंतरता से पड़ेगा।
पूर्व पृथ्वी विज्ञान सचिव एम. राजीवन ने कहा कि इस साल मॉनसून जल्दी शुरू होगा, लेकिन इसकी तीव्रता को लेकर अभी कोई पक्की बात नहीं कही जा सकती।
अब तक क्या असर दिखा है?
मई के असामान्य मौसम ने लोगों को कुछ हद तक गर्मी से राहत दी है। देश के ज़्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से नीचे रहा, जिससे लू से राहत मिली। परंतु यह राहत मानसून की मजबूती का संकेत नहीं मानी जा रही।
