पिछले तीन दिनों में पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग ने गंभीर रूप ले लिया है। इस संघर्ष में अब तक 240 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
पश्चिम एशिया में बिगड़े हालात, ईरान-इजरायल में भयानक संघर्ष
पिछले तीन दिनों में पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग ने गंभीर रूप ले लिया है। इस संघर्ष में अब तक 240 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इजरायल के हमलों में 230 से ज्यादा ईरानी नागरिकों की जान गई है और कई सौ लोग घायल हुए हैं। दूसरी ओर, ईरानी हमलों में इजरायल में 16 से ज्यादा मौतें और 100 से ज्यादा लोग घायल होने की पुष्टि हुई है। दोनों देशों के बीच भारी मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
तीन दिन में हुए हमले: मिसाइलें, ड्रोन और तबाही
ईरान ने इजरायल पर 100 से 200 बैलिस्टिक मिसाइलें और कई ड्रोन भेजे। इन हमलों से तेल अवीव की कई ऊंची इमारतें जमींदोज हो गईं। इसके अलावा, हाइफा बंदरगाह, नेगेव के परमाणु ठिकाने, किरयात गत और इजरायल की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया। लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए इजरायल ने आपातकाल की घोषणा कर दी है। राजधानी यरुशलम, तेल अवीव और हाइफा में सायरन बज रहे हैं और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं।
जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने ईरान के नतांज परमाणु केंद्र, तबरेज और करमानशाह जैसे प्रमुख ठिकानों पर हमला किया। इजरायली मिसाइलों ने ईरान के कई सैन्य बेस, परमाणु वैज्ञानिकों के ठिकाने और रिफाइनरी को निशाना बनाया। एक रिफाइनरी में हुए धमाके से बड़ा नुकसान हुआ है।
कश्मीरी छात्र घायल, भारत कर सकता है विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन
इस संघर्ष का असर अब भारत पर भी दिखने लगा है। ईरान की तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज परिसर के पास इजरायली हमले में जम्मू-कश्मीर के दो छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। ये छात्र हमले के वक्त अंतरराष्ट्रीय छात्र दूतावास के पास मौजूद थे।
भारत सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए ईरान में मौजूद भारतीयों के लिए सावधानी और सतर्कता की सलाह दी है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत जल्द ही एक विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर सकता है, ताकि छात्रों और अन्य नागरिकों को सुरक्षित देश वापस लाया जा सके।

ईरान ने दी नागरिकों को देश छोड़ने की अनुमति, 10 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र फंसे
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान सरकार ने भारत समेत कई देशों के नागरिकों को देश छोड़ने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद भारत सरकार के लिए अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालना आसान हो सकता है।
फिलहाल, ईरान में 10,000 से ज्यादा भारतीय छात्र हैं, जिनमें ज्यादातर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या जम्मू-कश्मीर के छात्रों की है। भारत सरकार इन छात्रों को अजरबैजान, तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाओं के जरिए सुरक्षित बाहर निकालने की योजना पर काम कर रही है।
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव केवल स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस किया जा रहा है। भारत सहित कई देश अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कदम उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं, इसलिए एहतियात और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।
