क्रिप्टो ETF: भारत की वित्तीय बाजार में अहम कड़ी
क्रिप्टो एसेट एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में क्रांति ला दी है, जिससे निवेशकों को बिटकॉइन और एथेरियम जैसे डिजिटल एसेट्स तक सुरक्षित, पारदर्शी और विनियमित पहुंच मिली है। अमेरिका, कनाडा और यूरोप में क्रिप्टो ETF को अपनाया जा चुका है, लेकिन भारत अभी भी नियामकीय अनिश्चितता के कारण पीछे है।
नई दिल्ली। 2 अप्रैल 2025
क्रिप्टो ETF तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और निवेशकों को डिजिटल संपत्तियों में सुरक्षित निवेश का अवसर प्रदान कर रहे हैं। जनवरी 2024 में, अमेरिकी SEC ने 11 स्पॉट बिटकॉइन ETF को मंजूरी दी, जिससे एक नया युग शुरू हुआ। विशेष रूप से, ब्लैकरॉक का iShares बिटकॉइन ट्रस्ट अपने गोल्ड ETF से भी आगे निकल गया। यूरोप और कनाडा में भी क्रिप्टो ETF को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।
एक PwC-AIMA रिपोर्ट के अनुसार, 47% हेज फंड अब डिजिटल संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं। HSBC, गोल्डमैन सैक्स और ब्लैकरॉक जैसी दिग्गज कंपनियां क्रिप्टो कस्टडी और ट्रेडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही हैं। EY-Parthenon और Coinbase के हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक, 83% संस्थागत निवेशक 2024 में अपने क्रिप्टो निवेश को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, जबकि 59% निवेशक 2025 तक अपने AUM का 5% से अधिक क्रिप्टो में लगाने की सोच रहे हैं।
भारत में नियामकीय अड़चनें
दुनिया भर में क्रिप्टो ETF को अपनाया जा रहा है, लेकिन भारत अब भी इससे दूरी बनाए हुए है। SEBI ने म्यूचुअल फंड कंपनियों को क्रिप्टो में निवेश से बचने की सलाह दी है, जिससे भारतीय निवेशकों को सुरक्षित और विनियमित निवेश विकल्प नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन, निवेशक विदेशी या अनौपचारिक विकल्पों का रुख कर रहे हैं, जिससे भारतीय कंपनियां प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रही हैं।
भारत को क्रिप्टो ETF की आवश्यकता क्यों है?
क्रिप्टो ETF सीधे क्रिप्टो खरीदने की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक निवेश विकल्प प्रदान करते हैं। अगर कोई व्यक्ति खुद बिटकॉइन खरीदता है, तो उसे हैकिंग, एक्सचेंज के अस्थिर होने और सुरक्षित कस्टडी जैसी कई चिंताओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन ETF में निवेश करने पर, इनकी कस्टडी ब्लैकरॉक जैसी संस्थागत कंपनियां संभालती हैं, जो उच्च स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
भारत को पूरी तरह से क्रिप्टो ETF अपनाने के बजाय, एक चरणबद्ध रणनीति अपनानी चाहिए। इसकी शुरुआत बिटकॉइन फ्यूचर्स ETF, वैश्विक क्रिप्टो कंपनियों से जुड़े ETF, या विदेशी क्रिप्टो ETF को अनुमति देने से की जा सकती है। 2021 में, SEBI ने एक ब्लॉकचेन-थीम वाले फंड ऑफ फंड्स को मंजूरी दी थी, लेकिन नियामकीय अनिश्चितता के कारण इसे रोक दिया गया था।
नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन
यदि SEBI क्रिप्टो ETF को मंजूरी देता है, तो यह निवेशकों की सुरक्षा, पूंजी प्रवाह में पारदर्शिता, और कर अनुपालन (Tax Compliance) को बढ़ावा देगा। आवश्यक सुरक्षा उपायों जैसे सख्त कस्टडी मानदंड, खुदरा निवेश सीमाएं और पारदर्शी प्रकटीकरण (Disclosure) नियमों के साथ, भारत नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन बना सकता है।
दुनिया भर में क्रिप्टो ETF मुख्यधारा का हिस्सा बन रहे हैं। अब भारत को यह तय करना है कि वह अपने निवेशकों को इस अवसर से वंचित रखना चाहता है या एक सुरक्षित और विनियमित निवेश मॉडल अपनाकर आगे बढ़ना चाहता है। सही समय अब है।
