कपूर परिवार की शर्तों के कारण मुमताज ने प्यार नहीं, करियर चुना
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शम्मी कपूर और खूबसूरत अदाकारा मुमताज की प्रेम कहानी भले ही कभी मंज़िल तक न पहुंच पाई हो, लेकिन आज भी लोग इसे याद करते हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में मुमताज ने इस अधूरे रिश्ते का ज़िक्र करते हुए बताया कि कैसे कपूर परिवार की सख्त परंपराओं के कारण उन्हें अपने करियर और प्यार में से एक को चुनना पड़ा – और उन्होंने अपना करियर चुना।
शादी का प्रस्ताव लेकिन शर्त के साथ
मुमताज ने रेडियो नशा को दिए गए इंटरव्यू में बताया कि शम्मी कपूर ने उन्हें शादी के लिए प्रपोज किया था। लेकिन इसके साथ एक शर्त थी – शादी के बाद वह फिल्मों में काम नहीं कर पाएंगी। यह नियम कपूर खानदान की परंपरा का हिस्सा था।
मुमताज ने कहा, “पापाजी (पृथ्वीराज कपूर) नहीं चाहते थे कि घर की बहुएं फिल्मों में काम करें। लेकिन मैं अपने करियर को लेकर बहुत गंभीर थी और मैंने तय कर लिया था कि मैं अभिनय नहीं छोड़ूंगी।” यही वजह थी कि यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ सका।
‘मेरा नाम जोकर’ का रोल भी हाथ से गया
इस अधूरे रिश्ते की वजह से मुमताज को करियर में भी नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि राज कपूर की मशहूर फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में उन्हें कास्ट किया जा रहा था। राज कपूर ने उनकी फोटोज भी खींची थीं, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि मुमताज की शादी शम्मी कपूर से हो सकती है और अगर ऐसा हुआ तो फिल्म अधूरी रह जाएगी।
राज कपूर ने यह सोचकर मुमताज को फिल्म से बाहर कर दिया और रोल किसी और को दे दिया। मुमताज ने जब यह सुना तो उन्होंने स्पष्ट किया कि शादी की कोई योजना नहीं है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
न कोई शिकायत, न मलाल
मुमताज ने इंटरव्यू में कहा कि उन्हें इस बात का कोई पछतावा नहीं है और उन्होंने कभी किसी से नाराज़गी नहीं रखी। उन्होंने कहा, “मैं किसी को दोष नहीं देती, सबका सम्मान करती हूं। जो होना था, वह हुआ।”
यह भी बता दें कि शम्मी कपूर की पहली शादी अभिनेत्री गीता बाली से हुई थी, जिनका निधन 1965 में हुआ। इसके बाद 1969 में उन्होंने नीला देवी से दूसरी शादी की। वहीं मुमताज ने 1974 में बिजनेसमैन मयूर माधवानी से विवाह किया।
कपूर परिवार की परंपराएं बनीं बाधा
कपूर खानदान में वर्षों से यह परंपरा रही है कि शादी के बाद घर की बहुएं फिल्मों में काम नहीं करती थीं। इस नियम ने कई महिलाओं के करियर को प्रभावित किया, और मुमताज भी इसका एक उदाहरण हैं।
शम्मी कपूर और मुमताज का रिश्ता भले ही अधूरा रह गया हो, लेकिन दोनों के प्रति लोगों का प्यार और सम्मान आज भी कायम है। यह कहानी न सिर्फ एक अधूरे प्यार की दास्तां है, बल्कि उस दौर की सोच और सामाजिक मान्यताओं की भी झलक देती है।
