मानवता विरोधी अपराधों में शेख हसीना पर संकट के बादल, इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल में पेश आरोपपत्र
जुलाई 2023 के जनविद्रोह को कुचलने के आदेश देने का आरोप
नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की कानूनी मुश्किलें गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी हैं। इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) में रविवार को उनके खिलाफ औपचारिक आरोप दायर किए गए हैं। आरोप है कि जुलाई 2023 में हुए राष्ट्रव्यापी जनविद्रोह के दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के आदेश दिए, जिससे सैकड़ों लोगों की जान गई।
ट्रिब्यूनल में दायर आरोपपत्र में कहा गया है कि शेख हसीना पर मानवता विरोधी अपराधों की श्रेणी में आने वाले गंभीर अपराधों का आरोप है, जिनमें सामूहिक हत्याएं और नागरिक स्वतंत्रता का दमन शामिल है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो उन्हें फांसी की सजा तक हो सकती है। सुनवाई की कार्यवाही बांग्लादेश के सरकारी टीवी पर लाइव प्रसारित की जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

पूर्व गृह मंत्री और पुलिस प्रमुख भी फंसे
शेख हसीना के साथ-साथ उनके तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पुलिस प्रमुख चौधरी मामून को भी अभियुक्त बनाया गया है। आरोपपत्र के मुताबिक, इन तीनों ने हिंसक प्रदर्शनों को रोकने के नाम पर देशभर में की गई गोलीबारी में निर्णायक भूमिका निभाई। जांच में यह भी सामने आया कि आदेश उच्च स्तर से दिए गए थे, जिनका पालन सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर किया।
जांच रिपोर्ट में ‘मुख्य साजिशकर्ता’ करार
12 मई को ट्रिब्यूनल को सौंपी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट में शेख हसीना को विरोध को कुचलने का “मुख्य आदेशदाता” बताया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी कीमत पर विद्रोह को रोका जाए, जिससे हालात हिंसक हो गए और जनसंहार जैसी स्थिति बन गई।
यह ट्रिब्यूनल वही है, जिसे बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद युद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए स्थापित किया गया था। इसके तहत पूर्व में कई जमात-ए-इस्लामी और BNP नेताओं को दोषी ठहराकर मृत्युदंड दिया जा चुका है।
भारत में शरण, प्रत्यर्पण को लेकर गतिरोध
जनविद्रोह के बाद सत्ता से बेदखल हुईं शेख हसीना वर्तमान में भारत में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने भारत में राजनीतिक शरण ली हुई है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, जिसे प्रो. यूनुस के नेतृत्व में गठित किया गया है, ने भारत सरकार से उनका प्रत्यर्पण मांगा है। हालांकि अभी तक भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
हसीना के शासनकाल में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते बेहद मजबूत माने जाते थे। लेकिन वर्तमान बांग्लादेश सरकार के चीन और पाकिस्तान के प्रति झुकाव के चलते दक्षिण एशिया की कूटनीति में नया मोड़ आता दिख रहा है। यह मामला भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी अत्यंत संवेदनशील बन गया है।
