दिल्ली में आयोजित आयोजन में ITRHD ने परंपरागत कारीगरी को संरक्षण और कमाई का नया रास्ता दिया।
नई दिल्ली | 7 जनवरी 2026
इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हेरिटेज एंड डेवलपमेंट (ITRHD) द्वारा आयोजित 12वें वार्षिक क्राफ्ट फेस्टिवल का शुभारंभ बुधवार को नई दिल्ली में हुआ। यह आयोजन ग्रामीण उत्तर प्रदेश और भारत–पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के कारीगरों को प्रत्यक्ष बाज़ार उपलब्ध कराने और उनकी पारंपरिक आजीविकाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
चार दिवसीय यह शिल्प उत्सव लोधी एस्टेट स्थित एलायंस फ़्रांसेज़, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। 10 जनवरी तक चलने वाले इस फेस्टिवल में सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक आम जनता के लिए निःशुल्क प्रवेश रहेगा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य कारीगरों और उपभोक्ताओं के बीच सीधे संवाद और बिक्री को बढ़ावा देना है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो सके।
प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना शोवना नारायण ने फेस्टिवल का उद्घाटन करते हुए भारत की जीवंत शिल्प परंपराओं के संरक्षण और सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर आईटीआरएचडी के चेयरमैन एस. के. मिश्रा भी उपस्थित रहे।
एस. के. मिश्रा ने कहा कि ट्रस्ट का प्रयास केवल शिल्प प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि कारीगरों को नए बाज़ारों से जोड़ते हुए उनकी सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित करना भी है। उन्होंने बताया कि ITRHD वर्षों से डिज़ाइन हस्तक्षेप, उत्पाद विविधीकरण और बाज़ार पहुँच जैसे क्षेत्रों में कारीगरों के साथ काम कर रहा है।
शोवना नारायण ने कहा कि भारतीय शिल्प केवल प्रदर्शनी की वस्तुएँ नहीं, बल्कि पीढ़ियों से जीवित परंपराएँ हैं, जो परिवारों और समुदायों से जुड़ी होती हैं। उन्होंने ऐसे मंचों को कारीगरों की पहचान और गरिमा बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक बताया।
इस वर्ष फेस्टिवल का विशेष फोकस पश्चिमी राजस्थान के बारमेर ज़िले पर है, जहाँ से छह कारीगर कढ़ाई, एप्लीक वर्क, चमड़ा शिल्प और अजरख प्रिंट जैसी पारंपरिक कलाओं के साथ भाग ले रहे हैं। कारीगर लाइव डेमो के ज़रिये अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे शहरी दर्शकों को इन दूरस्थ क्षेत्रों की शिल्प परंपराओं को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले से भी तीन अलग-अलग गाँवों के कारीगर फेस्टिवल का हिस्सा हैं। मुबारकपुर के हथकरघा बुनकर बनारसी परंपरा से जुड़े वस्त्र प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं निज़ामाबाद की विश्वप्रसिद्ध ब्लैक पॉटरी भी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण है। इस शिल्प को वैश्विक पहचान तब मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 के जी-7 शिखर सम्मेलन में जापान के प्रधानमंत्री को यह पॉटरी भेंट की थी।
ब्लैक पॉटरी से जुड़े युवा कलाकार अंकित प्रजापति ने कहा कि यह कला केवल उत्पाद नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही पारिवारिक विरासत है, जिसकी सही पहचान और इतिहास को संरक्षित करना आज सबसे बड़ी चुनौती है।
इसके अलावा, आज़मगढ़ के हरिहरपुर गाँव से जुड़े कलाकार 9 जनवरी को एलायंस फ़्रांसेज़ सभागार में शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति देंगे, जिससे शिल्प के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को भी मंच मिलेगा।
अपने 12वें संस्करण में पहुँच चुका यह क्राफ्ट फेस्टिवल हर वर्ष नई दिल्ली में आयोजित किया जाता है। इसके साथ ही ITRHD राजस्थान में कारीगरों के साथ निरंतर जुड़ाव बनाए रखने के लिए जोधपुर के मेहरानगढ़ किले में भी वार्षिक शिल्प आयोजन करता है, जिससे ग्रामीण कारीगरों को स्थायी और सम्मानजनक बाज़ार उपलब्ध कराया जा सके।
