नई रिपोर्ट में सामने आया कि भारतीय ट्रेडर्स का अधिकांश क्रिप्टो लेनदेन विदेशों में हो रहा है, जिससे TDS और कैपिटल गेन्स टैक्स में हजारों करोड़ का राजस्व नुकसान हो रहा है।
4 दिसंबर 2025
भारत में क्रिप्टोकरेंसी नियमन को लेकर चल रही बहस के बीच, TIOL नॉलेज फाउंडेशन की एक नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आँकड़े उजागर किए हैं। रिपोर्ट “Taxation of Digital Assets in India – A Data-Driven Assessment of India’s VDA Tax Regime and its Market Impact” के अनुसार वित्त वर्ष 2024–25 में भारतीय उपयोगकर्ताओं ने लगभग ₹4.88 लाख करोड़ का क्रिप्टो ट्रेड ऑफ़शोर प्लेटफॉर्म्स पर किया, जो भारतीय कर तंत्र की पकड़ से बाहर चला गया।
रिपोर्ट बताती है कि यह आंकड़ा Esya सेंटर की पिछली स्टडी के अनुरूप है, जिसमें भारतीयों द्वारा ऑफ़शोर क्रिप्टो ट्रेडिंग को लगभग ₹2.63 लाख करोड़ आंका गया था। यह स्पष्ट संकेत है कि भारतीय क्रिप्टो निवेशक सक्रिय हैं, लेकिन बड़ी मात्रा में ट्रेडिंग विदेशी एक्सचेंजों पर कर रहे हैं, जहां भारतीय कर नियम लागू नहीं होते।
कर नीति के कारण बढ़ा ऑफ़शोर रुझान
TIOL का मानना है कि ऑफ़शोर ट्रेडिंग में भारी वृद्धि 2022 के वित्त अधिनियम में किए बदलावों के कारण हुई। इस अधिनियम में क्रिप्टो पर—
- 30% फ्लैट टैक्स,
- हानि समायोजन पर रोक,
- हर लेनदेन पर 1% TDS
जैसे कड़े प्रावधान लागू किए गए थे। लेकिन सख्त करों का परिणाम उल्टा हुआ—घरेलू एक्सचेंजों पर वॉल्यूम गिर गया और उपयोगकर्ता विदेशी प्लेटफॉर्म्स की ओर शिफ्ट हो गए।
रिपोर्ट के मुताबिक FY24–25 में भारतीय एक्सचेंज मात्र ₹45,000 करोड़ की ट्रेडिंग पकड़ सके, जो कुल भारतीय वॉल्यूम का सिर्फ 8–10% है। जबकि 90% से अधिक यानी ₹4.88 लाख करोड़ विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर चले गए—कई प्लेटफॉर्म भारत में ब्लॉक हैं, लेकिन VPN के माध्यम से आसानी से एक्सेस किए जा रहे हैं।
भारी राजस्व हानि: TDS और टैक्स दोनों में गिरावट
TIOL का अनुमान है कि जुलाई 2022 में 1% TDS लागू होने के बाद भी भारतीय उपयोगकर्ताओं के ऑफ़शोर ट्रेड पर ₹11,000 करोड़ से अधिक TDS वसूल नहीं हो पाया। पिछले 12 महीनों में ही TDS की “गायब” राशि लगभग ₹4,877 करोड़ रही।
इसके अलावा, संभावित कैपिटल गेन्स टैक्स में लगभग ₹36,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो अगले पाँच वर्षों में भारतीय लगभग ₹39.9 लाख करोड़ ऑफ़शोर प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेड कर सकते हैं, जिससे FY2030 तक ₹39,971 करोड़ TDS की कमी हो सकती है।
पहली रिपोर्ट्स भी दिखाती थीं बड़ा गैप
- Esya सेंटर की “Taxes and Takedowns” रिपोर्ट में सामने आया था कि VDA टैक्स पैकेज आने के बाद 92% भारतीय ट्रेडिंग ऑफ़शोर शिफ्ट हो गई।
- NALSAR यूनिवर्सिटी के अध्ययन में ऑनशोर वॉल्यूम 97% तक गिर गया और लगभग ₹2,489 करोड़ की राजस्व हानि दर्ज की गई।
इसके साथ ही P2P ट्रेडिंग में भारी उछाल आया है, जिससे टैक्स वसूली और मॉनिटरिंग और भी मुश्किल हो गई है।
TIOL ने दिए सुधार के सुझाव
रिपोर्ट में कई अहम सुधार प्रस्तावित हैं, जिनमें शामिल हैं:
- सेक्शन 194S में संशोधन ताकि भारत में सेवाएं देने वाले सभी एक्सचेंज—चाहे घरेलू हों या विदेशी—TDS काटने के लिए बाध्य हों।
- VDA के कर ढांचे को अन्य एसेट क्लास की तरह तर्कसंगत बनाना।
- मॉनिटरिंग और टैक्स संग्रह बढ़ाने के लिए वार्षिक रिपोर्टिंग को अनिवार्य और मजबूत बनाना।
TIOL की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि जब दुनिया क्रिप्टो को अपने वित्तीय ढांचे में शामिल कर रही है, भारत के लिए यह जरूरी है कि वह अपनी कर नीतियों और नियामकीय रणनीति की पुनर्समीक्षा करे, वरना भारी राजस्व विदेशों में ही बहता रहेगा।
