ससुरालवालों ने बेटी होने पर घर से निकाला, लेकिन मां ने हार नहीं मानी। आज वही बेटी बन गई अफसर, और मां के संघर्ष को मिला असली सम्मान।
ये कहानी सिर्फ एक मां और बेटी की नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो हालातों से हार मानने की जगह उनसे लड़ता है। ये कहानी है *असम के श्रीभूमि जिले* की रहने वाली *बेबी सरकार* और उनकी बेटी *दीक्षा* की, जिन्होंने समाज की सोच को बदलकर दिखा दिया।
जब बेटी के जन्म पर ससुराल से निकाल दिया गया

शादी के बाद जब बेबी सरकार गर्भवती हुईं, तो ससुरालवालों ने साफ कह दिया – बेटा चाहिए, वरना घर छोड़ दो। पहले से ही चार देवरों की बेटियां थीं, इसलिए बहू से उम्मीद थी कि बेटा ही हो। लेकिन जब बेटी दीक्षा का जन्म हुआ, तो वही हुआ जिसका डर था – *ससुराल से निकाल दिया गया।*
पति ने भी कोई साथ नहीं दिया। बेबी अपनी नवजात बेटी को लेकर मायके आ गईं। वहां भी हालात अच्छे नहीं थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
अकेले दम पर बेटी को पाला, किया बड़ा
बेबी के पति ने फिर कभी संपर्क नहीं किया और 2011 में उनका निधन हो गया। बाद में सास भी चल बसीं। इन सबके बीच बेबी की बड़ी बहन *बिजोया* भी अकेली हो गईं जब उनके पति की मौत हो गई। अब दोनों बहनों और उनके बच्चों की जिम्मेदारी बेबी पर आ गई।
15 साल तक बेबी ने बहन के घर रहकर सबकी देखभाल की। फिर जब दीक्षा ने 10वीं पास की, तो मां-बेटी अलग किराये के घर में रहने लगीं। बेबी ने कई छोटे-मोटे काम किए ताकि बेटी की पढ़ाई न रुके।
दीक्षा की मेहनत और मौसी का साथ
दीक्षा ने गुवाहाटी से बॉटनी में बीएससी किया। जब आगे की पढ़ाई की बात आई, तो मौसी बिजोया ने बैंक से *2 लाख रुपये लोन* लेकर मदद की। बेबी और दीक्षा साथ में गुवाहाटी शिफ्ट हो गईं। 2023 में दीक्षा ने *असम सिविल सर्विस (ACS)* की तैयारी शुरू की।
साथ में दीक्षा ने ‘*Budding Aspirants*’ नाम से यूट्यूब चैनल भी शुरू किया, जिससे कुछ आमदनी होने लगी और पढ़ाई में मदद मिली।
वो दिन आया जब मां की मेहनत रंग लाई
आखिरकार ACS का रिजल्ट आया और *दीक्षा का नाम मेरिट लिस्ट में था*। अब दीक्षा अफसर बन चुकी हैं और उन्हें सरकारी आवास मिलने वाला है, जिसमें वह अपनी मां को साथ लेकर जाएंगी।
दीक्षा कहती हैं, “जो कुछ भी आज मैं हूं, वो मेरी मां और मौसी की वजह से हूं। मां ने दिन-रात मेहनत की और आज उनका समय है आराम करने का।”
