महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर Annu Kapoor का सख्त रुख
महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी को लेकर चल रहे Language Conflict ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस बीच वरिष्ठ अभिनेता Annu Kapoor ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा है कि भाषा के नाम पर की गई हिंसा पूरी तरह असंवैधानिक है और इसकी कड़ी निंदा होनी चाहिए।
चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए Annu Kapoor ने स्पष्ट कहा कि किसी भी नागरिक को अपनी आजीविका के लिए देश के किसी भी हिस्से में बसने का अधिकार है, लेकिन वहां की स्थानीय संस्कृति और भाषा का सम्मान करना भी उसका कर्तव्य है।
‘भाषा सम्मान का विषय है, हिंसा नहीं’ – Annu Kapoor
Annu Kapoor ने कहा कि भाषा किसी पर थोपने का माध्यम नहीं, बल्कि सम्मान का विषय होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति न्यूयॉर्क, पेरिस या लंदन जाता है, तो उसे वहां की भाषा सीखनी होती है। उसी तरह भारत के किसी भी हिस्से में रहने वाला व्यक्ति वहां की सांस्कृतिक मर्यादा का आदर करे, यह अपेक्षित है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को भाषा नहीं आती तो उसके लिए उस पर हमला करना या हिंसा करना पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने कहा, “Language Conflict के नाम पर अगर कोई कानून तोड़ता है, चाहे वह कोई भी हो – उसे सजा मिलनी चाहिए।”
‘राजनीति करने वालों को सज़ा मिलनी चाहिए’ – Language Conflict पर तीखा हमला
Annu Kapoor ने नाम लेते हुए कहा कि “राज ठाकरे हों, बाल ठाकरे हों या कोई अन्य नेता – अगर उन्होंने Language Conflict को आधार बनाकर हिंसा की है तो उन्हें कानून के अनुसार सजा दी जानी चाहिए।”
उन्होंने बताया कि यह एक पूर्व-नियोजित राजनीतिक रणनीति है, जिसमें नेता चाहते हैं कि देश भर में उनका नाम चर्चा में बना रहे। Kapoor ने कहा कि “राजनेता खबरों में रहना चाहते हैं, वे चाहते हैं कि लोग उनके बारे में बात करें। यह सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट है।”
उनका मानना है कि हिंसा एक अपराध है और हर अपराधी को सजा मिलनी चाहिए, भले वह किसी भी स्तर का हो।

Annu Kapoor को मिली थी धमकी, सरकार ने दी थी सुरक्षा
Annu Kapoor ने इस दौरान एक पुराने विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले साल मुंबई में उनकी एक फिल्म को लेकर विवाद हुआ था। कुछ मुस्लिम संगठनों ने उन पर जानलेवा हमले की धमकी दी थी, जिसके चलते महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की थी।
Kapoor ने कहा कि “जब मामला सुलझ गया, तो मैंने खुद सुरक्षा हटवाने की पहल की। लेकिन मुझे बताया गया कि इसके लिए आवेदन देना होगा। यह दिखाता है कि राजनीति और प्रशासन कितनी जटिलता से भरे हुए हैं।”
हिंदी को तीसरी भाषा बनाए जाने पर शुरू हुआ था विवाद
Language Conflict की शुरुआत तब हुई जब महाराष्ट्र सरकार ने अप्रैल में राज्य के स्कूलों में हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने का फैसला लिया। इसके खिलाफ मनसे और अन्य मराठी संगठनों ने विरोध शुरू किया और कई शहरों में हिंसक घटनाएं भी हुईं।
बढ़ते विरोध को देखते हुए सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा और शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने घोषणा की कि अब हिंदी वैकल्पिक विषय होगी और मराठी एवं अंग्रेजी प्राथमिकता वाली भाषाएं रहेंगी।
हालांकि, इसके बाद भी मुंबई और पुणे में कुछ घटनाएं सामने आईं, जहां मराठी बोलने से इनकार करने पर लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा।
यह भी पड़े: बिना शोर की क्रांति: बिहार में दो दशकों में हुआ ऐतिहासिक सामाजिक बदलाव
