कनाडा के फूड बैंकों में भारतीय छात्रों की एंट्री पर रोक, एक वायरल वीडियो बना वजह
कनाडा में भारतीय छात्रों के लिए जीवन हुआ और भी कठिन , मेहुल प्रजापति के वीडियो के कारण फूड बैंक ने बदली नीति
कनाडा में रह रहे हजारों भारतीय छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहां के फूड बैंकों ने विदेशी छात्रों, खासकर भारतीयों को मुफ्त राशन देना बंद कर दिया है। इस कड़े फैसले की वजह बना एक भारतीय छात्र मेहुल प्रजापति का वायरल इंस्टाग्राम वीडियो, जिसमें उसने बताया कि कैसे वह फूड बैंक से मुफ्त में हफ्तों की ग्रोसरी ले आता है और करीब 400 डॉलर बचा लेता है।
जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, कनाडा की सोशल मीडिया पर हलचल मच गई और लोगों ने कहा कि फूड बैंक, जो गरीब और ज़रूरतमंद लोगों की मदद के लिए बने थे, उनका गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसके बाद से कई फूड बैंकों ने नियमों में बदलाव करते हुए घोषणा कर दी कि अब सिर्फ कनाडा के नागरिक या PR (परमानेन्ट रेसिडेंट) कार्ड धारक ही इन सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।
फूड बैंक क्यों बने थे और कैसे बिगड़ी तस्वीर
कनाडा में 1987 से फूड बैंक चर्च और सामाजिक संगठनों की मदद से चलाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य था जरूरतमंदों, शरणार्थियों और गरीबों को मुफ्त भोजन देना। लेकिन 2024 में हालात बदले। आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा की 3.8 करोड़ की आबादी में अब लाखों लोग फूड बैंक से मदद ले रहे हैं, जिससे वहां के संसाधनों पर बहुत ज्यादा बोझ पड़ गया है।वहीं, कुछ लोग इस व्यवस्था का दुरुपयोग भी करने लगे। इसी कड़ी में मेहुल प्रजापति के वीडियो ने आग में घी डालने का काम किया। वीडियो में वह खुलेआम कहता दिखा कि वह फूड बैंक से राशन लेकर पैसे बचाता है। इस बयान को गंभीरता से लेते हुए कनाडाई जनता और फूड बैंक संचालकों में नाराज़गी फैल गई।
अब और कठिन हुआ भारतीय छात्रों का जीवन
भारतीय छात्रों के लिए कनाडा में जीवन पहले ही आसान नहीं है। महंगी पढ़ाई, सीमित वर्क परमिट (सप्ताह में 20 घंटे), भारी ठंड और महंगाई के बीच फूड बैंक उनके लिए एक सहारा थे। वहां उन्हें खाने-पीने का सामान, यहां तक कि गर्म कपड़े तक मिल जाते थे।
पर अब इन बैंकों से सहायता न मिलने से, उन्हें रहने और खाने के लिए और ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। कई छात्र भारत से भारी कर्ज लेकर जाते हैं, माता-पिता अपनी संपत्ति तक गिरवी रख देते हैं, ऐसे में वहां जीवन यापन के लिए मिलने वाली कोई भी राहत बड़ी मदद साबित होती है।
कनाडा की नीति और सामाजिक माहौल में बदलाव
प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल माइग्रेशन नीति के तहत कनाडा ने बड़ी संख्या में लोगों को बसाया, विशेषकर दक्षिण एशिया और चीन से। लेकिन अब वहां की स्थानीय आबादी एशियाई प्रवासियों से असहज महसूस कर रही है।
फूड बैंक की सुविधा बंद होना इसी सामाजिक तनाव की एक कड़ी मानी जा रही है। यह घटना बताती है कि कैसे एक छात्र की लापरवाही बाकी हजारों की मुश्किलें बढ़ा सकती है।
अब भारतीय छात्रों को ज्यादा समझदारी और संयम से व्यवहार करना होगा क्योंकि विदेश में एक छोटी गलती की कीमत बहुत बड़ी हो सकती है।
