सावन का पहला सोमवार उत्तर भारत के लिए केवल एक धार्मिक दिन नहीं, बल्कि एक अध्यात्मिक महोत्सव बनकर आया।
Shivbhakton की श्रद्धा से सराबोर हुआ पूरा उत्तर प्रदेश
Sawan का पहला सोमवार उत्तर भारत के लिए केवल एक धार्मिक दिन नहीं, बल्कि एक अध्यात्मिक महोत्सव बनकर आया। पूरे प्रदेश में Shivbhakton की अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिली, जिन्होंने अलसुबह उठकर शिवालयों की ओर रुख किया। Kashi, Prayagraj, गोरखपुर, जौनपुर, महाराजगंज जैसे जिलों के हज़ारों मंदिरों में घंटों की लाइनें लगीं, जहां भक्तों ने गंगाजल, बेलपत्र, दूध, दही और पान से शिवलिंग का अभिषेक किया। श्रद्धालु ‘बोल बम’ के जयकारे लगाते हुए आस्था में पूरी तरह डूबे नजर आए। हर मंदिर में विशेष सजावट की गई और पुजारियों ने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कराई।
Kashi Vishwanath में हजारों Shivbhakton ने निभाई ऐतिहासिक परंपरा
Kashi स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन की पहली सोमवारी पर एक अनोखी परंपरा का निर्वहन हुआ। यादव समुदाय की ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार, हजारों Shivbhakton ने डमरू बजाते हुए गंगाजल से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया। मान्यता है कि यह परंपरा एक ऐतिहासिक सूखे के दौरान शुरू हुई थी, जब महात्माओं की सलाह पर जलाभिषेक से बारिश हुई थी। इस वर्ष भी लगभग 20,000 श्रद्धालु इस परंपरा का हिस्सा बने, हालांकि सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए गर्भगृह में केवल 21 Shivbhakton को ही प्रवेश की अनुमति मिली।

Prayagraj में दिव्यांग Shivbhakton ने दिखाई आस्था की मिसाल
Prayagraj के दशाश्वमेध घाट से कांवर यात्रा पर निकले दिव्यांग Shivbhakton ने आस्था और साहस का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रतापगढ़ से आए एक दिव्यांग भक्त, जो दोनों पैरों से असमर्थ हैं, पूरी श्रद्धा से ‘बोल बम’ का नारा लगाते हुए कांवर लेकर निकले। उनकी भक्ति और समर्पण ने हर किसी को भावविभोर कर दिया। इस यात्रा ने यह साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा के सामने कोई शारीरिक चुनौती बाधा नहीं बन सकती। Prayagraj के अन्य घाटों और मंदिरों पर भी भक्तों की अपार भीड़ उमड़ी, जिन्होंने गंगा जल से शिव का अभिषेक कर पुण्य अर्जित किया।
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पूर्वांचल के मंदिरों में दिखी शिवभक्ति की दिव्यता और ऐतिहासिकता
भारत-नेपाल सीमा से सटे इटहियां धाम में पंचमुखी शिवलिंग पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। मंदिर के इतिहास के अनुसार, निचलौल स्टेट के राजा वृषभसेन की गाय नंदिनी द्वारा एक झाड़ी पर दूध चढ़ाने के बाद यहां पंचमुखी शिवलिंग की प्राप्ति हुई थी। इस मान्यता के चलते हजारों Shivbhakton ने यहां जलाभिषेक किया। वहीं, मऊ जिले के प्राचीन गौरीशंकर मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ रही। 700 साल पुराना यह मंदिर Kashi और गोरखपुर मार्ग पर स्थित है और यहां की मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें जरूर पूरी होती हैं।
गोरखपुर, जौनपुर से लेकर मऊ तक Shivbhakton की आस्था का समंदर
गोरखपुर के झारखंडी मंदिर, मानसरोवर मंदिर और मुक्तेश्वर नाथ मंदिर समेत हर प्रमुख शिवालय में श्रद्धालु सुबह 4 बजे से ही लाइन में लग गए थे। हर कोई जलाभिषेक कर बाबा भोलेनाथ से कृपा की कामना कर रहा था। Kashi से लेकर मऊ तक हर जिले में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। Prayagraj और जौनपुर में ड्रोन और CCTV कैमरों से निगरानी की गई, ताकि सावन की सोमवारी पर कोई अनहोनी न हो। इस बार की कांवड़ यात्रा और सोमवारी पर विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों की उपस्थिति ने यह प्रमाणित कर दिया कि Shivbhakton की आस्था सीमाओं से परे है।
