Jagdeep Dhankhar ने UPSC की IAS परीक्षा पास की थी, लेकिन उन्होंने प्रशासनिक सेवा की बजाय वकालत को अपने पेशे के रूप में चुना।
IAS की नौकरी ठुकराकर Jagdeep Dhankhar ने चुना वकालत का रास्ता
Jagdeep Dhankhar ने UPSC की IAS परीक्षा पास की थी, लेकिन उन्होंने प्रशासनिक सेवा की बजाय वकालत को अपने पेशे के रूप में चुना। राजस्थान यूनिवर्सिटी से LLB करने के बाद 1979 में वकील के तौर पर करियर की शुरुआत की। केवल 35 वर्ष की उम्र में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सबसे युवा अध्यक्ष बने और उसी वर्ष उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा भी प्राप्त हुआ। वकालत के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता ने उन्हें ओबीसी आरक्षण जैसे सामाजिक मुद्दों में बड़ी भूमिका निभाने का अवसर दिया

गांव से निकलकर Vice President तक का सफर
Jagdeep Dhankhar का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव में एक साधारण जाट किसान परिवार में हुआ था। चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर रहे धनखड़ ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की और रोजाना 5 किलोमीटर पैदल स्कूल जाते थे। बचपन में ही उन्होंने सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में दाखिला लिया, जहां से उनके जीवन में अनुशासन और नेतृत्व के गुण निखरे।
IIT और NDA छोड़कर चुनी पढ़ाई, बनी मिसाल
सैनिक स्कूल के दौरान ही Jagdeep Dhankhar का चयन IIT और NDA दोनों के लिए हुआ था, लेकिन उन्होंने इन विकल्पों को छोड़कर शिक्षा पर ध्यान देना चुना। जयपुर के महाराजा कॉलेज से फिजिक्स में B.Sc ऑनर्स किया और फिर राजस्थान यूनिवर्सिटी से LLB। इसके बाद उन्होंने UPSC क्लियर किया, लेकिन IAS की नौकरी स्वीकार करने के बजाय देश सेवा के लिए वकालत को चुना।
राजनीति में भी लहराया परचम, अब दिया इस्तीफा
1989 में जनता दल से सांसद बने Jagdeep Dhankhar चंद्रशेखर सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री भी रहे। बाद में कांग्रेस और फिर 2003 में बीजेपी में शामिल हुए। 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे और 2022 में NDA के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बने। उन्होंने 74% से अधिक वोटों से जीत दर्ज की और भारत के 14वें उपराष्ट्रपति बने। अब, 2025 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया।
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