भारत की एयर डिफेंस शील्ड: कैसे पाकिस्तान के हमलों को नाकाम कर बना लोहे की दीवार
जानिए कैसे बनी ये सुरक्षा प्रणाली और कैसे करती है काम
हाल ही में पाकिस्तान ने 7 से 10 मई के बीच कई बार एलओसी पार से भारत पर हमले की कोशिश की, लेकिन हर बार भारत की मजबूत एयर डिफेंस शील्ड ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। भारतीय सेना और वायुसेना की इस शानदार प्रणाली ने दुश्मन के हथियारों को हवा में ही खत्म कर दिया। इसके बाद दुनियाभर में भारत के एयर डिफेंस सिस्टम की चर्चा होने लगी और इसकी तुलना अमेरिका और इस्राइल जैसे देशों की सुरक्षा प्रणालियों से की जाने लगी।
IACCS: भारत की हवाई सुरक्षा की मजबूत दीवार
IACCS यानी इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम भारत की वायुसेना की सबसे अहम सुरक्षा प्रणाली है। इसकी शुरुआत 1999 में करगिल युद्ध के बाद हुई, जब यह महसूस हुआ कि देश को एक ऐसा सिस्टम चाहिए जो हवा और जमीन से होने वाले हमलों से एकसाथ निपट सके।
इसके बाद 2003 में IACCS बनाने की तैयारी शुरू हुई। फिर 2010 में AFNET यानी एयर फोर्स नेटवर्क शुरू हुआ, जिससे सेना का पूरा संचार सिस्टम डिजिटल हो गया। इसके चलते सेना के सभी हिस्सों के बीच तालमेल और तेजी से काम करने की क्षमता काफी बढ़ गई।

कैसे काम करती है भारत की एयर डिफेंस प्रणाली
भारतीय रक्षा प्रणाली कई परतों में काम करती है:
1. बाहरी परत:
यह सबसे आगे की सुरक्षा परत होती है। इसमें S-400 जैसे लॉन्ग-रेंज मिसाइल सिस्टम और लड़ाकू विमान होते हैं, जो 300 किमी तक मार कर सकते हैं। इसका मकसद दुश्मन के हमले को सीमा पार ही रोकना है।
2. अंदरूनी परत:
अगर कोई हमला पहली परत से बच जाता है, तो दूसरी परत काम में आती है। इसमें कम ऊंचाई पर मार करने वाली तोपें, शिल्का गन, एल-70 गन और मैनपैड्स होते हैं जो दुश्मन के हथियारों को पास आने से पहले ही तबाह कर देते हैं।
थलसेना की ‘आकाशतीर’ प्रणाली भी है तैयार
वायुसेना की तरह थलसेना ने भी अपनी एयर डिफेंस प्रणाली तैयार की है, जिसका नाम ‘आकाशतीर’ है। इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है। इसका मकसद जमीन से नजदीक उड़ने वाले हथियारों की निगरानी और उनका खात्मा है। इसे IACCS से जोड़ा जा रहा है ताकि दोनों सेनाएं मिलकर काम कर सकें।
दुश्मन के हर वार पर तगड़ा जवाब
चाहे S-400 की लंबी दूरी की मार हो या शिल्का और एल-70 की नजदीकी सुरक्षा – भारत की यह बहुस्तरीय एयर डिफेंस शील्ड आज दुश्मन के हर हमले का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। यही वजह है कि अब भारत की यह प्रणाली पूरी दुनिया में मिसाल बनती जा रही है।
