21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देश के जवानों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि योग सिर्फ एक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है।
बर्फीली चोटियों से समुद्री तटों तक गूंजा योग
21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देश के जवानों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि योग सिर्फ एक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है। उत्तर में सियाचिन ग्लेशियर की ठंडी वादियों से लेकर दक्षिण के पोर्ट ब्लेयर के समुद्री किनारों तक, और पूर्व के अरुणाचल प्रदेश से लेकर पश्चिम के कच्छ तक—हर मोर्चे पर सैनिकों ने एकजुट होकर योग किया।
इन कठिन और चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी हमारे जवानों ने विभिन्न योगासन कर यह संदेश दिया कि चाहे परिस्थिति कैसी भी हो, योग तन-मन को मजबूत बनाता है। सेना द्वारा साझा किए गए वीडियो में जवानों को पहाड़ों, झीलों, रेगिस्तान और सीमाओं पर योग करते देखा गया।
सेना ने माना – योग है लचीलापन और अनुशासन का स्त्रोत
भारतीय सेना ने योग को केवल शारीरिक फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक मजबूती का जरिया बताया। सेना के अनुसार, योग कठिन से कठिन परिस्थिति में भी फोकस बनाए रखने और तन्यकता (लचीलापन) बढ़ाने में मदद करता है।
सेना के जवानों ने सीमाओं पर तैनाती के दौरान समय निकालकर योग अभ्यास कर यह दिखाया कि योग सिर्फ जिम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू में मदद करता है – खासकर तनाव और दबाव वाली स्थितियों में।
CISF ने 430 से ज्यादा जगहों पर किया योग सत्र का आयोजन
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने इस योग दिवस को खास बनाने के लिए पूरे जून महीने योग कार्यक्रम चलाए। देशभर की 430 से अधिक यूनिट्स और फॉर्मेशन्स में नियमित योग सत्र आयोजित किए गए।
दिल्ली स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में CISF मुख्यालय में एक विशेष योग कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें 100 से ज्यादा जवानों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व CISF के अतिरिक्त महानिदेशक पद्माकर रणपिसे ने किया।
CISF ने इस बार की थीम “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग” को अपनाया और बताया कि योग केवल शरीर को नहीं, बल्कि सोच और सहनशक्ति को भी मजबूत करता है।

BSF ने सीमाओं पर मनाया योग दिवस, लोगों ने भी लिया हिस्सा
सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को जोरदार ढंग से मनाया। अटारी-वाघा और हुसैनीवाला बॉर्डर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में BSF पंजाब फ्रंटियर के महानिरीक्षक (IG) अतुल फुलजले ने खुद नेतृत्व किया।
सिर्फ जवान ही नहीं, इन कार्यक्रमों में स्थानीय ग्रामीण, स्कूलों के छात्र, खिलाड़ियों और पद्म पुरस्कार विजेताओं ने भी हिस्सा लिया। इससे यह संदेश गया कि योग देश की सीमाओं तक ही नहीं, समाज के हर वर्ग तक पहुंच गया है।
योग बना राष्ट्रीय एकता और अनुशासन का प्रतीक
देशभर में हुए इन कार्यक्रमों ने यह साबित किया कि योग केवल स्वास्थ्य का जरिया नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अनुशासन का भी प्रतीक है। सैनिकों और सुरक्षाबलों ने योग के माध्यम से यह दिखाया कि जब तन, मन और आत्मा संतुलित हों, तभी देश मजबूत बनता है।
इन प्रयासों से यह भी संदेश गया कि योग हर किसी के लिए है – चाहे वो सीमाओं पर तैनात जवान हों या आम नागरिक। ऐसे आयोजन न सिर्फ सेहत को बढ़ावा देते हैं, बल्कि देश को एक सूत्र में भी पिरोते हैं।
