ईरान-इजरायल टकराव: अगर जंग छिड़ी तो कौन रहेगा भारी? तकनीक बनाम संख्या की जंग में कौन जीतेगा?
मिडिल ईस्ट एक बार फिर जंग के मुहाने पर
पश्चिम एशिया एक बार फिर अशांति की चपेट में है। इजरायल और ईरान के बीच हालिया सैन्य टकराव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान और उसके आस-पास के इलाकों पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल के तेल अवीव और यरुशलम को निशाना बनाया। दोनों देशों में पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर जंग छिड़ती है, तो कौन-सा देश भारी पड़ेगा?
जनसंख्या और क्षेत्रफल में ईरान का पलड़ा भारी
अगर बात आकार और आबादी की करें तो ईरान इजरायल से कहीं बड़ा है। ईरान का क्षेत्रफल करीब 16 लाख वर्ग किलोमीटर है और इसकी जनसंख्या लगभग 8.8 करोड़ है। इसके मुकाबले, इजरायल सिर्फ 22,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ एक छोटा सा देश है जिसकी जनसंख्या 90 लाख के आसपास है। लेकिन आधुनिक युद्ध सिर्फ संख्या पर नहीं, रणनीति और तकनीक पर भी निर्भर करता है।
सैनिक संख्या में ईरान मजबूत, लेकिन नेतृत्व को नुकसान
ईरान की सेना काफी बड़ी है। इसके पास करीब 6 लाख सैनिकों की नियमित फौज है और इसके अलावा IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) में 2 लाख से ज्यादा जवान हैं। ईरान पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ प्रॉक्सी वॉर में भी माहिर है। लेकिन हाल ही में इजरायल द्वारा किए गए हमलों में ईरान को बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मारे जा चुके हैं, जिनमें IRGC प्रमुख और सेना प्रमुख भी शामिल हैं। इससे ईरानी सेना की कमान और रणनीतिक योजना पर असर पड़ सकता है।

तकनीकी और हथियारों में इजरायल सबसे आगे
ईरान के पास भले ही सैनिक ज्यादा हैं, लेकिन उसके अधिकतर हथियार पुराने हैं। रूस से मिले कुछ नए सिस्टम जैसे S-300 मिसाइल डिफेंस सिस्टम ज़रूर हैं, लेकिन बाकी अधिकतर हथियार या तो इस्लामिक क्रांति से पहले के हैं या रूस और चीन से मिले पुराने सिस्टम हैं। इसके मुकाबले, इजरायल की सेना अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। उसके पास आयरन डोम डिफेंस सिस्टम, फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट्स, सैटेलाइट तकनीक, साइबर वॉर क्षमताएं और विश्वस्तरीय खुफिया एजेंसियां हैं, जो किसी भी हमले का तेज़ी से जवाब देने में सक्षम हैं।
ड्रोन और प्रॉक्सी वार में ईरान की चालाकी, लेकिन इजरायल तैयार
ईरान के पास अपने बनाए हुए सस्ते और असरदार ड्रोन हैं, जिन्हें उसने रूस को भी बेचा है। ये ड्रोन सीमित तकनीक वाले होते हैं, लेकिन भारी संख्या में हमले कर सकते हैं। हालांकि, इजरायल के पास इन ड्रोन हमलों से निपटने की आधुनिक प्रणाली और रडार सिस्टम है, जो इन खतरों को समय रहते निष्क्रिय कर सकते हैं।
निष्कर्ष: लंबी लड़ाई में बदल सकता है समीकरण, फिलहाल इजरायल मजबूत
अगर दोनों देशों के बीच युद्ध होता है, तो संख्या और क्षेत्रफल के हिसाब से ईरान मजबूत जरूर है, लेकिन तकनीक, तैयारी, खुफिया जानकारी और वैश्विक समर्थन के मामले में इजरायल फिलहाल आगे दिख रहा है। हालांकि, अगर यह टकराव लंबा चलता है और दूसरे क्षेत्रीय देश भी इसमें शामिल होते हैं, तो समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि अंत में कौन जीतेगा, लेकिन शुरुआत में इजरायल की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
