विधिक कार्य विभाग ने रक्तदान शिविर लगाकर निभाई सामाजिक ज़िम्मेदारी, विश्व रक्तदाता दिवस से पहले बड़ा संदेश
जनकल्याण के प्रति संवेदनशीलता का परिचायक बनी विभाग की पहल
नई दिल्ली के शास्त्री भवन में 12 जून 2025 को विधिक कार्य विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर ने यह दर्शाया कि सरकारी संस्थाएं केवल नीतियों के निर्माण तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाती हैं। इस शिविर का आयोजन भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से किया गया, जिससे यह आयोजन और भी व्यापक और असरदार बन सका।

रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण कदम
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य 14 जून को मनाए जाने वाले विश्व रक्तदाता दिवस से पहले रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और उन्हें प्रेरित करना था। विभाग ने न सिर्फ अपने कर्मचारियों को इस मुहिम से जोड़ा बल्कि एक व्यापक संदेश दिया कि रक्तदान एक मानवीय कर्तव्य है।
विधि सचिव डॉ. अंजू राठी राणा की प्रेरणादायक उपस्थिति
इस अवसर पर विधि सचिव डॉ. अंजू राठी राणा स्वयं शिविर में उपस्थित रहीं और उन्होंने न केवल भाग लिया बल्कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से यह अपील की कि वे रक्तदान को एक सामाजिक उत्तरदायित्व समझकर आगे आएं। उनकी भागीदारी ने पूरे कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया और अन्य प्रतिभागियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।
महिला अधिकारियों और स्टाफ की सक्रिय भागीदारी
रक्तदान शिविर में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ महिला अधिकारियों और अन्य स्टाफ सदस्यों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। यह दर्शाता है कि समाज की सेवा के ऐसे कार्यों में सभी स्तरों के लोग समान रूप से योगदान दे सकते हैं, चाहे वे किसी भी पद पर क्यों न हों। सभी ने स्वेच्छा से रक्तदान कर दूसरों के जीवन को बचाने में अपनी भूमिका निभाई।

वैश्विक थीम “रक्त दें, आशा दें” के अनुरूप आयोजन
इस वर्ष की वैश्विक थीम “रक्त दें, आशा दें: साथ मिलकर जीवन बचाएं” को यह आयोजन पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित करता है। यह नारा केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शास्त्री भवन के इस शिविर में उसे व्यवहार में भी उतारा गया। यह सिद्ध करता है कि नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान न केवल जीवन बचाता है, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी सुदृढ़ करता है।

नीति निर्माण से आगे बढ़कर जनसेवा में विभाग की भूमिका
विधिक कार्य विभाग ने इस शिविर के माध्यम से स्पष्ट कर दिया कि सरकारी दफ्तरों की भूमिका केवल फाइलों और नीतियों तक सीमित नहीं है। औपचारिकताओं से परे जाकर जब कोई संस्था समाज के हित में कदम उठाती है, तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। यह शिविर एक उदाहरण है कि सरकारी संस्थाएं कैसे समय आने पर सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब सरकारी संस्थान अपने दायरे से बाहर आकर जनकल्याण में योगदान देते हैं, तो उसका प्रभाव गहरा और प्रेरणादायक होता है। रक्तदान जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और दूसरों को भी प्रेरित करती है।
