गाजा में पारले-जी बिस्कुट की कीमत 2400 रुपये, भारत से भेजने की उठी मांग
पिता ने बेटे की मुस्कान के लिए चुकाई भारी कीमत
गाजा में रह रहे मोहम्मद जावेद नाम के एक व्यक्ति ने ट्विटर पर बताया कि उनके बेटे राफिफ को उसका पसंदीदा पारले-जी बिस्कुट मिल गया। लेकिन इसकी कीमत सुनकर हर कोई चौंक गया—यह बिस्कुट 24 यूरो यानी करीब 2400 रुपये में मिला। मोहम्मद ने लिखा कि इतने महंगे होने के बावजूद वो अपने बेटे को ये देने से मना नहीं कर सके। इस भावुक कहानी के साथ एक प्यारी-सी तस्वीर भी वायरल हुई, जिसमें पिता-पुत्र की खुशी साफ झलक रही है।
भारत में लोगों ने पारले-जी भेजने की अपील की
जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर पहुंची, भारत में बड़ी संख्या में लोगों ने भावनात्मक प्रतिक्रिया दी। ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लोगों ने पारले कंपनी और भारत सरकार से अपील की कि गाजा में ज़रूरतमंदों तक पारले-जी और अन्य खाने-पीने की चीजें पहुंचाई जाएं। एक यूजर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को टैग करते हुए लिखा, “वो बच्चा भारत का सबसे प्यारा बिस्कुट खा रहा है। क्या हम उसे और भेज सकते हैं?” लोगों ने यह दिखाया कि भारत में पारले-जी सिर्फ एक बिस्कुट नहीं, भावनाओं की डोरी है।
गाजा में खाने-पीने की चीजें बनीं लग्जरी
इस समय गाजा में भीषण खाद्य संकट चल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मानवीय सहायता सीमित मात्रा में पहुंच रही है और उसकी सही तरीके से बांटाई नहीं हो रही। इसके कारण कालाबाजारी तेज हो गई है। जरूरी सामान आसमान छूते दामों पर बिक रहा है—एक किलो चीनी लगभग 4914 रुपये, तेल 4177 रुपये, प्याज 4423 रुपये और आलू 1965 रुपये में मिल रहे हैं। यहां तक कि एक कप कॉफी भी 1800 रुपये में बिक रही है। ऐसे में पारले-जी जैसे बिस्कुट का मिलना भी लक्ज़री बन गया है।
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पारले-जी बना भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक
पारले-जी बिस्कुट, जो 1938 में लॉन्च हुआ था, आज भी भारतीयों की पहली पसंद बना हुआ है। पहले इसका 100 ग्राम पैक 5 रुपये में मिलता था, लेकिन अब इसी कीमत पर केवल 55 ग्राम बिस्कुट मिलता है। इसके बावजूद यह हर तबके के लिए सस्ता, स्वादिष्ट और भरोसेमंद स्नैक बना हुआ है। साल 2024-25 में कंपनी का मुनाफा दोगुना होकर 1606.95 करोड़ रुपये हो गया है। इस दौरान कंपनी ने प्रचार पर भी करीब 442 करोड़ रुपये खर्च किए।
क्या भारत भेजेगा मानवीय मदद?
भारत सरकार ने गाजा संघर्ष को लेकर भले ही तटस्थ रुख अपनाया हो, लेकिन मानवीय सहायता देने में भारत हमेशा आगे रहा है। अब जब सोशल मीडिया पर यह भावुक मुद्दा सामने आया है, तो उम्मीद जताई जा रही है कि भारत पारले-जी और अन्य राहत सामग्री गाजा तक भेजने में कोई नई पहल कर सकता है। यह पूरी कहानी एक बार फिर दिखाती है कि भारत के लोग सिर्फ अपने देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में जहां ज़रूरत हो वहां इंसानियत का हाथ बढ़ाने को तैयार हैं।
