यूपी में पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज़, गांवों की होगी नई संरचना
शासन ने सभी जिलों से 5 जून तक मांगे पुनर्गठन प्रस्ताव
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026 में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके तहत राज्य के गांवों और पंचायतों का पुनर्गठन किया जा रहा है। सरकार ने शुक्रवार को सभी जिलों को आदेश भेजा है कि वे 5 जून 2025 तक ग्राम पंचायतों और राजस्व ग्रामों के पुनर्गठन के प्रस्ताव भेजें।
पिछले पंचायत चुनाव 2021 में हुए थे, जिसके बाद कई गांवों को नगर पंचायत, नगर पालिका या नगर निगम में शामिल कर दिया गया है। इससे कुछ ग्राम पंचायतों की आबादी घटकर 1,000 से कम हो गई है, जो कि पंचायत बनाए रखने के लिए जरूरी न्यूनतम सीमा है। अब सरकार इन्हीं पंचायतों की नए सिरे से संरचना तय कर रही है।
शहरी विस्तार से बदले गांवों की स्थिति
शहरी क्षेत्रों के विस्तार की वजह से कई गांव अब नगर निकायों का हिस्सा बन चुके हैं। शासन के अनुसार, जिन ग्राम पंचायतों का ज़्यादातर हिस्सा अब शहरी क्षेत्र में शामिल हो गया है, उन्हें भंग कर दिया जाएगा। जो बचे हुए गांव हैं, उन्हें पास की किसी दूसरी पंचायत में मिला दिया जाएगा।
अगर कोई पंचायत का हिस्सा शहर में चला गया हो, लेकिन बाकी गांवों की आबादी 1,000 से ज़्यादा है, तो उस बचे हुए हिस्से को एक नई स्वतंत्र पंचायत के रूप में गठित किया जाएगा।
नगर निकायों पर फिलहाल रोक
सरकार ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया को सही समय पर पूरा कराने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब नए नगर पंचायत, नगर पालिका या नगर निगम नहीं बनाए जाएंगे और न ही उनकी सीमाएं बढ़ाई जाएंगी। इस संबंध में पंचायती राज विभाग ने नगर विकास विभाग को औपचारिक पत्र भेजकर इस पर रोक लगाने को कहा है।
जिलों में बनी पुनर्गठन समितिय
हर जिले में पंचायतों के पुनर्गठन के लिए एक चार सदस्यीय समिति बनाई गई है। इसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे और इसमें मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी (जो कि सदस्य सचिव होंगे) और अपर मुख्य अधिकारी भी शामिल हैं। यह समितियाँ यह भी सुनिश्चित करेंगी कि जिले में किसी नगर निकाय का सीमा विस्तार या नया गठन लंबित न हो।
2026 में होंगे पंचायत चुनाव
राज्य की ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों का कार्यकाल मई से जुलाई 2026 के बीच समाप्त हो रहा है। पहले मतदाता सूची का संशोधन, वार्डों का निर्धारण, आरक्षण की प्रक्रिया और जातिगत आंकड़ों का अद्यतन कार्य किया जाएगा। ये सभी प्रक्रियाएं करीब छह महीने का समय ले सकती हैं। इसलिए सरकार अभी से तैयारी में जुट गई है ताकि चुनाव समय पर कराए जा सकें।
