आईएएस की नौकरी छोड़ फिल्मी दुनिया में रखा कदम, पहली ही फिल्म ने दिलाया नेशनल अवॉर्ड
आईएएस की कुर्सी छोड़ थामा कैमरा, पापा राव बियाला बने नेशनल अवॉर्ड विजेता फिल्म निर्माता
भारत में आईएएस बनना लाखों युवाओं का सपना होता है, क्योंकि यह न केवल एक सम्मानजनक पद है बल्कि देश की सेवा करने का सुनहरा अवसर भी देता है। लेकिन क्या हो जब कोई स्थापित आईएएस अधिकारी अपनी नौकरी छोड़कर फिल्मों की दुनिया में कदम रखे? ये कहानी है पापा राव बियाला की, जिन्होंने प्रशासनिक सेवा की ऊंचाइयों को छूने के बाद अपना दिल फिल्मों को दे दिया और आज एक नेशनल अवॉर्ड विनर फिल्म मेकर बन चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र से फिल्मों तक का सफर
पापा राव बियाला पहले बीवीपी राव के नाम से जाने जाते थे। वे 1982 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने उस्मानिया यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की थी और अपने करियर में असम के गृह सचिव से लेकर संयुक्त राष्ट्र के मिशन में कोसोवो में सेवा दी। 2014 से 2019 तक वे तेलंगाना सरकार में नीति सलाहकार भी रहे, जो एक कैबिनेट मंत्री के समान दर्जा वाला पद होता है।
लेकिन इस सफल प्रशासनिक करियर के पीछे उनके दिल में एक कलाकार छिपा हुआ था। फिल्मों के प्रति उनका प्रेम 90 के दशक में सामने आया, जब उनके दोस्त टॉम ऑल्टर ने उन्हें फिल्म निर्माता जाह्नू बरुआ से मिलवाया। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क फिल्म अकादमी से फिल्ममेकिंग का डिप्लोमा किया।

पहली ही फिल्म को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
फिल्म निर्माण के क्षेत्र में पापा राव बियाला की पहली कोशिश रही एक शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री ‘Willing to Sacrifice’, जो पर्यावरण पर आधारित थी। इस फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। यह सफलता उनके फिल्मी सफर की एक शानदार शुरुआत थी।
2020 में दी प्रशासनिक सेवा को अलविदा
हालांकि शुरू में उन्होंने फिल्मों में रुचि दिखाने के बाद फिर से प्रशासनिक सेवा में वापसी की, लेकिन उनका रचनात्मक मन शांत नहीं हुआ। आखिरकार, साल 2020 में उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण से इस्तीफा देकर पूरी तरह से सिनेमा को अपनाने का फैसला किया।
‘म्यूजिक स्कूल’ से किया फिल्मी पर्दे पर डेब्यू
2023 में उनकी पहली फीचर फिल्म ‘Music School’ रिलीज हुई। इस फिल्म में श्रिया सरन और शरमन जोशी ने अहम भूमिकाएं निभाईं। फिल्म में दिखाया गया कि शिक्षा प्रणाली बच्चों पर किस तरह दबाव डालती है और कैसे उनकी रचनात्मकता को दबा दिया जाता है। हालांकि फिल्म को आलोचकों से सराहना मिली, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफल नहीं रही। इसकी एक वजह फिल्म में बड़े सितारों की गैरमौजूदगी और प्रचार की कमी भी मानी जा रही है।
फिल्म बनाना प्रशासन से आसान: पापा राव
डीएनए को दिए एक इंटरव्यू में पापा राव बियाला ने कहा, “प्रधानमंत्री की यात्रा या आपातकालीन योजना बनाना बेहद कठिन होता है, फिल्म बनाना उसके मुकाबले आसान है।” उनका मानना है कि फिल्में समाज को बदलने का बड़ा माध्यम हैं और इसी वजह से वे अब पूरी तरह इस दिशा में काम कर रहे हैं।
जल्द आएगी अगली फिल्म
फिलहाल पापा राव बियाला अपनी अगली फिल्म की तैयारी में जुटे हुए हैं। उन्होंने अभी तक अपनी नई फिल्म की घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके फैन्स को उनके अगले प्रोजेक्ट का बेसब्री से इंतजार है। उनके साहसिक फैसले और जुनून ने साबित कर दिया है कि अगर सच्ची लगन हो, तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती।
