तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 14% हुई, नेतृत्व स्तर पर अब भी चुनौती बरकरार
2020 से 2024 के बीच महिलाओं की तकनीकी भागीदारी में सात गुना वृद्धि, समावेशी कार्यस्थल की ओर बढ़ता भारत
नई दिल्ली, 29 मई – भारत के गैर-तकनीकी क्षेत्रों में तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। टीमलीज डिजिटल की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में जहां यह भागीदारी मात्र 1.90% थी, वहीं 2024 तक यह आंकड़ा 14% तक पहुंच गया है। यह बदलाव कार्यस्थलों में बढ़ती समावेशिता और विविधता की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
टीमलीज डिजिटल की सीईओ नीति शर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह प्रगति महिलाओं के लिए एक बेहतर और समावेशी भविष्य की ओर बढ़ते कदम को दर्शाती है। हालांकि, तकनीकी नेतृत्व और कौशल विकास के क्षेत्र में अब भी बड़ा अंतर बना हुआ है, जिसे पाटने की आवश्यकता है।”
पुरुष-प्रधान क्षेत्रों में अब महिलाएं भी बना रही हैं जगह
रिपोर्ट के मुताबिक, गैर-तकनीकी क्षेत्रों में तकनीकी कार्यों में महिलाओं की भागीदारी 2020 में जहां 9.51% थी, वह 2024 तक बढ़कर 27.98% हो गई है। यह ट्रेंड दर्शाता है कि पहले जिन क्षेत्रों में पुरुषों का वर्चस्व था, वहां अब महिलाएं तकनीकी भूमिकाओं में आगे आ रही हैं।
यह प्रगति डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, विविधता को प्रोत्साहन देने वाली हायरिंग रणनीतियों और नीतिगत बदलावों का परिणाम मानी जा रही है। इससे यह साफ होता है कि कंपनियां अब विविधता को केवल विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता मान रही हैं।
सेक्टर के हिसाब से भागीदारी में बड़ा अंतर
हालांकि समग्र आंकड़े उत्साहजनक हैं, फिर भी अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी में भारी अंतर है। उदाहरण के तौर पर:
- बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा): 46.88%
- लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर: 29.58%
- मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग: केवल 82%
- एनर्जी सेक्टर: 6.25%
ये आंकड़े बताते हैं कि कुछ सेक्टर्स में महिलाओं के लिए अब भी अवसर सीमित हैं और वहां सुधार की आवश्यकता है।
नेतृत्व पदों पर महिलाओं की स्थिति अब भी कमजोर
रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी काफी कम है।
- सीनियर लेवल: 86%
- मिड-लेवल: 14%
- एंट्री लेवल: 03%
हालांकि, 2023 से 2024 के बीच इनमें कुछ वृद्धि देखी गई है, लेकिन यह अब भी असमानता को दर्शाता है। यह साफ करता है कि महिलाओं को नेतृत्व की मुख्यधारा में लाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
नीति निर्माण और प्रशिक्षण से बढ़ेगा प्रतिनिधित्व
टीमलीज डिजिटल की सीईओ नीति शर्मा ने जोर देकर कहा, “अब वक्त आ गया है कि कंपनियां महिलाओं के लिए और अधिक समावेशी नीतियां, तकनीकी प्रशिक्षण, और लचीली हायरिंग प्रणाली विकसित करें। इससे महिलाओं को न केवल प्रवेश मिलेगा, बल्कि नेतृत्व तक पहुंचने का अवसर भी मिलेगा।”
यह रिपोर्ट भारत में कार्यस्थलों पर लैंगिक समानता की दिशा में एक अहम पड़ाव मानी जा रही है, लेकिन आगे की राह अब भी चुनौतीपूर्ण है।
