Jagannath Yatra का आखिरी पड़ाव आज संपन्न हो रहा है। भगवान Jagannath, बलभद्र और सुभद्रा आज अपने मूल निवास श्रीमंदिर लौट रहे हैं।
बाहुड़ा यात्रा से होगा रथ यात्रा का समापन
Jagannath Yatra का आखिरी पड़ाव आज संपन्न हो रहा है। भगवान Jagannath, बलभद्र और सुभद्रा आज अपने मूल निवास श्रीमंदिर लौट रहे हैं। यह दिन पुरी के लिए केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक उल्लास का उत्सव है। इस मौके पर पुरी का ग्रांड रोड हरि बोल के नारों और भगवा-सफेद झंडों से गूंज उठा है। लाखों श्रद्धालु इस दिव्य यात्रा के साक्षी बन रहे हैं।
बाहुड़ा यात्रा, जो रथ यात्रा की वापसी होती है, ओड़िया शब्द “बाहुड़ा” से लिया गया है, जिसका मतलब होता है “वापसी”। यह परंपरा हर वर्ष उसी श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाई जाती है, जैसी मुख्य रथ यात्रा के समय होती है।

गुंडिचा मंदिर से वापसी, मौसी मां को मिलेगा पोड़ा पीठा
पिछले 9 दिनों से भगवान जगन्नाथ अपने मौसी देवी गुंडिचा के मंदिर में दिव्य विश्राम कर रहे थे। अब वो अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ श्रीमंदिर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। यात्रा के दौरान भगवानों के विशाल रथ—तालध्वज (बलभद्र), दर्पदलन (सुभद्रा), और नंदीघोष (जगन्नाथ)—पुरी के नकाचना द्वार पर सज-धज कर खड़े हैं।
परंपरा के अनुसार, Jagannath Yatra के दौरान रथों को खींचते हुए भगवान कुछ देर के लिए मौसी मां के अर्धासनी मंदिर में रुकेंगे। यहां उन्हें ओड़िशा की खास मिठाई पोड़ा पीठा अर्पित की जाएगी। यह विशेष पकवान चावल, गुड़, नारियल और दाल से बनता है, जो भगवान को अत्यंत प्रिय है।
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सुबह 4 बजे शुरू हुई पूजा, दोपहर में होगी ‘पहंडी‘ रस्म
बाहुड़ा यात्रा के दिन का शुभारंभ सुबह 4:00 बजे मंगला आरती के साथ हुआ। इसके बाद तड़प लगी, रोजा होम, अबकाश, और सूर्य पूजन समेत कई धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए गए। फिर गोपाल बलभ, द्वारपाल पूजा और सकाला धूप जैसे विधिविधान संपन्न हुए।
दोपहर में ‘पहंडी’ रस्म के तहत भगवानों को मंदिर से रथों तक लाया जाएगा। यह रस्म दोपहर 12 बजे से शुरू होकर 2:30 बजे तक चलेगी। इसके बाद पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव छेरा पहंरा अनुष्ठान करेंगे। वे सोने की झाड़ू से रथों की सफाई कर भक्तिपूर्ण विनम्रता और समानता का संदेश देते हैं। यह अनुष्ठान Jagannath Yatra की एक भव्य और दिव्य परंपरा का प्रतीक है।
शाम 4 बजे से भक्त खींचेंगे रथ, 6 जुलाई को सुनाबेशा का आयोजन
जब सभी अनुष्ठान पूर्ण हो जाएंगे और लकड़ी के घोड़े रथों से जोड़ दिए जाएंगे, तब शाम 4:00 बजे से भक्त रथ खींचना शुरू करेंगे। सबसे पहले बलभद्र का तालध्वज रथ चलेगा, फिर सुभद्रा का दर्पदलन और अंत में भगवान Jagannath का नंदीघोष रथ अपने गंतव्य की ओर बढ़ेगा।
इसके बाद 6 जुलाई को ‘सुनाबेशा’ उत्सव मनाया जाएगा, जिसमें भगवान रथों पर स्वर्ण आभूषणों से सजाए जाएंगे। यह दृश्य भक्तों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगा। अंत में 8 जुलाई को ‘नीलाद्री बिजे’ अनुष्ठान के तहत भगवान श्रीमंदिर में वापस प्रवेश करेंगे और इस प्रकार Jagannath Yatra 2025 का आध्यात्मिक
