MERI College of Engineering and Technology में 30 जून से 5 जुलाई 2025 तक "सुपरकंप्यूटिंग और क्वांटम कंप्यूटिंग" विषय पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का आयोजन किया जा रहा है।
MERI में AICTE द्वारा प्रायोजित FDP की शुरुआत
MERI College of Engineering and Technology में 30 जून से 5 जुलाई 2025 तक “सुपरकंप्यूटिंग और क्वांटम कंप्यूटिंग” विषय पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम AICTE द्वारा प्रायोजित है और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उन्नत विषयों की समझ को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह विषय वर्तमान युग में उच्च तकनीकी शोध, नवाचार और राष्ट्रीय प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं।
उद्घाटन समारोह में विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति
FDP के पहले दिन MERI College में उद्घाटन समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें प्रो. ललित अग्रवाल (उपाध्यक्ष, MERI Group), प्रो. (डॉ.) उमेश गुप्ता (निदेशक, MERI-CET), और प्रो. (डॉ.) प्रीत सिंह (प्राचार्य, MERI PLI) जैसे प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन प्रो. (डॉ.) युद्धवीर सिंह, निदेशक, UIET, MDU रोहतक द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को तकनीकी नवाचार और शोध की दिशा में प्रेरित करते हुए उच्च शिक्षा में उन्नत तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
सुपरकंप्यूटिंग के इतिहास पर कीनोट एड्रेस
कार्यक्रम के उद्घाटन भाषण (Keynote Address) में प्रो. विक्रम गोयल, प्रोफेसर, IIIT दिल्ली ने भारत में सुपरकंप्यूटिंग की यात्रा और इसके भविष्य पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे देश में तकनीकी ढांचे के विकास के साथ सुपरकंप्यूटिंग की मांग और उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि फैकल्टी सदस्यों को उभरती तकनीकों की बारीक समझ होना आवश्यक है ताकि वे छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर सकें।
नवाचार-संचालित शिक्षा के लिए MERI की प्रतिबद्धता
यह छह दिवसीय FDP कार्यक्रम AICTE से मान्यता प्राप्त संस्थानों के फैकल्टी और शोधार्थियों के लिए आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को उन्नत तकनीकी विषयों में दक्ष बनाना है, ताकि वे शिक्षा और अनुसंधान में नई सोच और रचनात्मकता का समावेश कर सकें।
MERI College का यह आयोजन उसके उन प्रयासों को दर्शाता है, जो तकनीकी शिक्षकों के सतत विकास, नवाचार, और उन्नत तकनीकी ज्ञान के प्रसार हेतु किए जा रहे हैं। संस्थान का लक्ष्य न केवल शिक्षा देना है, बल्कि शिक्षकों और शोधकर्ताओं को ऐसा मंच उपलब्ध कराना भी है, जहां वे भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर सकें।
