अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के कारोबारी हलकों को चौंकाते हुए प्रतिस्पर्धात्मक शुल्क (Reciprocal Tariff) बढ़ाने की आख़िरी तारीख़ 9 जुलाई से बढ़ाकर 1 अगस्त कर दी है
Trump का बड़ा एलान: 9 जुलाई की मियाद अब 1 अगस्त
US President डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के कारोबारी हलकों को चौंकाते हुए प्रतिस्पर्धात्मक शुल्क (Reciprocal Tariff) बढ़ाने की आख़िरी तारीख़ 9 जुलाई से बढ़ाकर 1 अगस्त कर दी है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार महंगाई, निर्यात प्रतिबंधों और आपूर्ति‑श्रंखला टूटने के दबाव से जूझ रहा है। Tarif Par Rahat की यह घोषणा न केवल शेयर बाज़ारों में सकारात्मक हलचल लाने में सफल रही, बल्कि कंपनियों को रणनीति दोबारा गढ़ने के लिए अतिरिक्त तीन हफ़्तों का अहम मौक़ा भी देती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस एक कदम से अस्थिरता पर ब्रेक लगने के साथ‑साथ निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।
India‑America डील पर बढ़ी उम्मीदें
राष्ट्रपतिTrumpने संकेत दिया है कि India के साथ बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील “बहुत जल्द” संभव है। 2 अप्रैल को घोषित Tarif के खिलाफ़ जब शक्तिशाली विरोध हुआ तो 90 दिन की अंतरिम छूट दी गई थी, जिसकी अवधि अब बढ़ा कर 1 अगस्त कर दी गई है। इससे नई दिल्ली और वॉशिंगटन दोनों को समझौते की जटिल धाराओं पर फिर से बातचीत का समय मिल गया है। भारतीय निर्यातक ‘मेड‑इन‑इंडिया’ उत्पादों—खासतौर पर फार्मा, ऑटो‑पार्ट्स और आईटी सेवाओं—पर लगने वाले टैक्स में राहत की आस लगाए हुए हैं। Tarif Par Rahat से जुड़े इस विस्तार ने भारतीय उद्योग जगत में “सही दिशा में बड़ा कदम” जैसी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं।

व्हाइट हाउस का औपचारिक आदेश जल्द
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति जल्द ही एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर करेंगे। यह आदेश Tarif पर तत्काल प्रभाव से अस्थायी राहत देगा, ताकि चल रही वार्ताओं में वाणिज्यिक तनाव कम रहे और किसी भी तरह के “डील‑ब्रेकिंग” कदम से बचा जा सके। लेविट के मुताबिक, Tarif Par Rahat का मुख्य उद्देश्य “साझेदार देशों को ज़्यादा गुंजाइश देना” है, जिससे वे घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचाए बिना द्विपक्षीय व्यापार‑असंतुलन दूर कर सकें। विश्लेषकों का मानना है किTrumpप्रशासन इस फैसले से संभावित कानूनी चुनौतियों और विदेशी प्रतिशोधात्मक शुल्क के खतरे को भी टाल रहा है।
किसे मिली छूट, किन पर टिका रहा दबाव?
ब्रिटेन और वियतनाम पहले ही America के साथ सफल ट्रेड डील साइन कर चुके हैं, लिहाज़ा वे नई डेडलाइन से अप्रभावित रहेंगे। दूसरी ओर, बांग्लादेश, जापान, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड सहित 14 देशों पर 25 से 40 फ़ीसदी तक के भारी Tarif अभी भी लागू रहेंगे। सूचीबद्ध दरें कुछ यूँ हैं—म्यांमार‑लाओस 40%, थाईलैंड‑कंबोडिया 36%, बांग्लादेश‑सर्बिया 35%, इंडोनेशिया 32%, जबकि जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, कज़ाख़स्तान और ट्यूनीशिया पर 25% शुल्क। विशेषज्ञ चेताते हैं कि यदि ये राष्ट्र 1 अगस्त तक किसी समझौते पर नहीं पहुँचे तो “कॉस्ट‑पुश इन्फ्लेशन” का नया दौर शुरू हो सकता है। फिर भी, “बातचीत के रास्ते खुले” रखने के अमेरिकी रुख ने Tarif Par Rahat को वैश्विक सुर्खियों में बनाए रखा है।
घरेलू और वैश्विक बाज़ारों पर असर
डेडलाइन विस्तार की खबर से वॉल स्ट्रीट और बीएसई‑निफ़्टी दोनों ने तेज़ी दिखाई। America में मैन्युफ़ैक्चरिंग युनिट्स को आयातित कच्चे माल के दाम स्थिर रहने की उम्मीद मिली, जबकि India में ऑटो और टेक सैक्टर के स्टॉक्स में दोपहर के सत्र तक औसतन 3‑5 फ़ीसदी उछाल देखा गया। IMF के ताज़ा विश्लेषण के अनुसार, यदि बहुपक्षीय समझौते समय पर हो गए, तो 2025 के अंत तक वैश्विक GDP में 0.4 फ़ीसदी की अतिरिक्त वृद्धि संभव है। यही वजह है कि नीति‑निर्माता इस मौके को “विन‑विन विंडो” बता रहे हैं। कुल मिलाकर, बढ़ी हुई समयसीमा ने व्यापार मंडियों को राहत की सांस दी है और बाज़ारों में भरोसे का नया संचार किया है—और यही है आज की सबसे बड़ी Tarif Par Rahat।
